जेयू: म.प्र.इतिहास परिषद का तीन दिवसीय अधिवेशन
ग्वालियर। इतिहास मानव जीवन कल्याण के लिए है।समाज चिंतन के अंदर सही से कार्य करने की आवश्यकता है। इतिहास प्रेरणा देने का काम करता है, विश्वास खड़ा करने का काम करता है। वर्तमान कैसा हो पिछला हमें यह सोचने का मौका देता है।भारत आज दुनिया के केंद्र में आया है यह लगभग दो हजार वर्ष बाद ऐसा समय आया है।
चाहे रूस यूक्रेन युद्ध हो या कोरोना।नई नई चीजों को खोजना जानना अतिआवश्यक है जो चीजें इतिहास में रह गईं हैं उनको मुख्य धारा से जोड़ना अनिवार्य है। यह बात ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान हिमाचल के निर्देशक डॉ.चेतराम गर्ग ने जेयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित म.प्र. इतिहास परिषद के 40वें अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि कही। अध्यक्षता जेयू के कुलाधिसचिव प्रो.डीएन गोस्वामी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कुरूक्षेत्र विवि के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.एसके चहल,म.प्र.इतिहास परिषद के अध्यक्ष प्रो.बीके श्रीवास्तव व सचिव प्रो.नवीन गिडियन उपस्थित रहे। आयोजन सचिव प्रो.एसके द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.एसके चहल ने कहा कि इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है। राजनीति से जुड़े हुए लोगों के कारण ऐसा हुआ है। ऐसे सेमिनार होते रहना चाहिए जिससे नए शोधार्थियों को प्रोत्साहन मिलेगा और कुछ नया सीखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले ने सामाजिक सुधार के लिए उत्कृष्ट कार्य किए।समाज सुधार हिंदू धर्म में रहा है न कि अन्य धर्मों में। प्रो.नवीन गिडियन ने कहा कि इस सेमिनार से बहुत सी नई चीजें सीखने को मिली।प्रो.बीके श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास में कई चीजें ऐसी हैं जिनका उजागर होना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विवि के कुलाधिसचिव प्रो.डीएन गोस्वामी ने कहा कि इतिहास ऐसा विषय है इससे दूर नहीं रह सकते। कहीं न कहीं हम अपने चिंतन को भूले हैं जब तक हम अपने चिंतन को याद नहीं करेंगे तब तक हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। इतिहासकार हमेशा सत्य के साथ होता है।ऐसे सेमिनार होते रहना चाहिए इससे निश्चित ही शोधार्थियों को सीखने का मौका मिलेगा।कार्यक्रम में सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।जिसमें 135 शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।कार्यक्रम का संचालन उर्वशी राठौर ने किया।कार्यक्रम के अंत में म.प्र. इतिहास परिषद के स्थानीय सचिव डॉ.शांतिदेव सिसौदिया के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।इस अवसर पर प्रो.जेएन गौतम, प्रो.आरए शर्मा,प्रो.जनार्दन तिवारी, प्रो.एसएन महापात्रा,प्रो.एके सिंह, डॉ.रामशंकर सिंह सहित ख्यातिप्राप्त विद्वान व शोधार्थी उपस्थित रहे।









