ग्वालियर की सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त: नगर निगम को एक सप्ताह में DPR देने के निर्देश, गलत माप दर्ज हुआ तो आयुक्त भी होंगे जिम्मेदार

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अब 8 सितंबर को होगी सुनवाई
ग्वालियर शहर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ कि जस्टिस जीएस आहलुवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए सड़कों के नमूने लेने और Network Survey Vehicle (NSV) से जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही नगर निगम ग्वालियर को सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए एक सप्ताह के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पेश करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम ने यदि एक सप्ताह में डीपीआर नहीं दी तो उसके लिए आयुक्त को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी। PIL याची कैलाश अग्रवाल के अभिभाषक अवधेश सिंह तोमर भी मौजूद रहे.

आठ के बजाय चार सड़कों से होगी जांच
सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए पहले आठ सड़कों से नमूने लिए जाने थे। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की सहमति के बाद सड़कों की संख्या घटाकर चार कर दी गई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि नगर निगम ग्वालियर, लोक निर्माण विभाग (PWD) ग्वालियर और NHAI से संबंधित सड़कों की जांच की जाए। आयोग को पूर्व में चिन्हित सात सड़कों में से तीन सड़कों का चयन करने की अनुमति दी गई है।
NSV से होगी सड़क की ‘एक्स-रे’ जैसी जांच
NHAI की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सड़क की गुणवत्ता की जांच Network Survey Vehicle के माध्यम से की जा सकती है। इस तकनीक से सड़क को खोदे बिना उसकी अंदरूनी स्थिति की जांच की जा सकती है। कोर्ट ने 30 अगस्त 2026 को NHAI, नगर निगम और PWD की एक-एक चयनित सड़क की NSV से स्कैनिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
जरूरत पड़ने पर नगर निगम और PWD की सड़कों से भौतिक नमूने भी 3 सितंबर और 6 सितंबर को लिए जा सकेंगे।
रिपोर्ट आने के बाद तय होगी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस PIL का मुख्य मुद्दा ग्वालियर की खराब सड़कों की स्थिति है। किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की दीवानी अथवा आपराधिक जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जाएगी।
सड़क निर्माण में गड़बड़ी मिली तो आयुक्त भी जिम्मेदार
कोर्ट ने नगर निगम को 8 नवंबर 2025 को नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय द्वारा जारी SOR के अनुसार सड़क निर्माण करने की अनुमति दी है। लेकिन प्रत्येक Measurement Book का नगर निगम आयुक्त द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी होगा।
कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि Measurement Book में दर्ज काम और मौके पर वास्तव में किए गए काम में अंतर पाया गया, तो संबंधित अन्य अधिकारियों के साथ नगर निगम आयुक्त भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
सड़कों की मरम्मत को लेकर भी नगर निगम को निर्देश
कोर्ट ने कहा कि ग्वालियर की जनता सुचारु और अच्छी तरह निर्मित सड़कों की हकदार है। नगर निगम को शहर की अन्य सड़कों का निर्माण कोर्ट की अनुमति लेकर करने की बात कही गई है। साथ ही नगर निगम यह बहाना नहीं बना सकता कि मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण सड़क निर्माण नहीं किया जा सकता।
एक सप्ताह में DPR नहीं आई तो कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
नगर निगम को सड़क निर्माण के साथ-साथ क्षतिग्रस्त हिस्सों के पैचवर्क और मरम्मत के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एक सप्ताह में दाखिल करनी होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि DPR दाखिल नहीं की जाती है तो यह माना जाएगा कि नगर निगम सड़कों का उचित निर्माण करने में रुचि नहीं रखता और उसने ग्वालियर के नागरिकों को “भगवान के भरोसे” छोड़ दिया है।
अगली सुनवाई 8 सितंबर को

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