चंडीगढ़ – पंजाब के वन और वन्यजीव संरक्षण विभाग की पक्षियों की गणना के अनुसार इस वर्ष पंजाब में 5 वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों की संख्या कम हुई है।

जानकारी के अनुसार पंजाब में 7 प्रोटैक्टिड वेटलैंड हैं। इनमें से 6 को रामसर साइट्स या फिर अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड घोषित किया गया है। इन 6 वेटलैंडों में हरिके वाइल्डलाइफ सैंचुरी, नंगल वाइल्डलाइफ सैंचुरी, रोपड़ कंजर्वेशन रिजर्व, कांजली वेटलेंड, ब्यस रिवर कंजर्वेशन रिजर्व और किशोपुर-मियानी कम्यूनिटी रिजर्व शामिल हैं। पंजाब के 7वें वैटलैंड रंजीत सागर कंजर्वेशन रिजर्व को नैशनल वैटलैंड के रूप में मान्यता प्राप्त है।
सैंडपिपर्स, प्लोवर्स, गल, टर्न्स यूरेशियन कूट, गडवाल, कॉमन पोचर्ड, यूरेशियन विजेन, रूडी शेल्डक, कॉमन टील, स्पूनबिल्स और पेंटेड स्टॉर्क पंखों वाले प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियां हैं। कांजली वैटलैंड में सबसे अधिक 49.49 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस साल केवल 601 पक्षी पहुंचे। वहीं इस साल रोपड़ कंजर्वेशन रिजर्व 48 फीसदी की गिरावट रही। हरीके वैटलैंड में इस साल केवल 84 प्रजातियों के केवल 65624 पक्षी आए। पिछले साल यह गिनती 74869 थी। अगर एक्सपर्ट्स की मानें तो वैटलैंड के नजदीक मौसम के पैटर्न में बदलाव के चलते पक्षी कम पहुंचे हैं। इसके अलावा उन्होंने निर्माण गतिविधियों, अतिक्रमणों और लैंडस्केप में बदलाव को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वे सभी जलपक्षियों की निगरानी रख रहे हैं।












