ग्वालियर नगर निगम का फर्जीवाड़ा उजागर, दो अधिकारियों सहित चार पर FIR

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संपत्तिकर रिकॉर्ड में हेरफेर कर फर्जी रसीद से कराया संपत्ति का पंजीयन, रिटायर्ड अधिकारी महेंद्र शर्मा सहित चार पर FIR 

ग्वालियर, बिल्लू बादशाह

कई सालों से भ्रष्टाचार का महा अड्डा बना ग्वालियर नगर निगम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।  नगर निगम की संपत्तिकर शाखा के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर फर्जी संपत्तिकर रसीद के आधार पर संपत्ति का विक्रय पत्र पंजीयन कराने के मामले में थाना विश्वविद्यालय पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपियों में पिछले दिनों रिटायर्ड हुए संपत्ति कर विभाग के अधिकारी महेंद्र शर्मा और एक कर संग्रहक TC नरेंद्र कुशवाह भी शामिल है।

 

नगर निगम की जांच के आधार पर पुलिस ने विक्रेता जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह, क्रेता अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह, एआरआई नरेन्द्र कुशवाह तथा तत्कालीन एपीटीओ महेंद्र शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज, पद के दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य सुसंगत धाराओं में कार्रवाई शुरू की है।

ऐसे किया फर्जीवाड़ा 

शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी, निवासी टैगोर नगर, वार्ड-30 की मूल संपत्तिकर आईडी 1000255876 है। आरोप है कि उनकी संपत्ति के रिकॉर्ड में दूसरी आईडी 1000107294 तैयार कर गलत दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज किया गया। ई-नगर पालिका से मिली लॉग रिपोर्ट के अनुसार 20 मार्च 2025 को शाम 4:17 से 5:41 बजे के बीच इस आईडी में स्वामी का नाम विजय पुत्र राजाराम पाल से बदलकर जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह और कॉलोनी का नाम जागृति नगर-37 से 01 टैगोर नगर-30 किया गया। 28 मार्च 2025 को निर्मित क्षेत्रफल में भी बदलाव किया गया। रिकॉर्ड परिवर्तन की लॉग में तत्कालीन एआरआई एवं कर संग्राहक नरेन्द्र कुशवाह की यूजर आईडी तथा तत्कालीन एपीटीओ महेंद्र शर्मा की ईएनपी 1.0 यूजर आईडी का उल्लेख है।

दिया था कारण बताओ नोटिस

नगर निगम ने नरेन्द्र कुशवाह को कारण बताओ नोटिस दिया था, लेकिन 31 जुलाई 2026 को मिला उनका जवाब संतोषजनक नहीं माना गया। निगम के अनुसार नरेन्द्र कुशवाह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि महेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जिस संपत्तिकर रसीद के आधार पर 15 मई 2025 को जयनारायण ने संपत्ति का विक्रय अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह, निवासी यमुना नगर, ग्वालियर के पक्ष में किया, वह रसीद नगर निगम कार्यालय से जारी ही नहीं हुई थी। नगर निगम ने मूल संपत्तिकर रसीद, कथित फर्जी रसीद, लेजर, विक्रय पत्र, टैक्स कलेक्टर व राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट और ई-नगर पालिका की प्रमाणित लॉग फाइल पुलिस को सौंपी है। नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक संपत्तिकर को आयुक्त की 25 अगस्त 2026 की नोटशीट के जरिए स्नढ्ढक्र आवेदन प्रस्तुत करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद थाना विश्वविद्यालय में आवेदन दिया गया और अब पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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