नशेड़ियों को अफीम या पोस्त चूरा नियंत्रित तरीके से दिया जाए तो पंजाब में नशा कम होगा

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चंडीगढ़ – सिंथैटिक ड्रग्स से लोगों को दूर करने के लिए उनको नियंत्रित तरीके से अफीम या चूरा पोस्त आदि दिया जाना चाहिए। यह सलाह पंजाब के पूर्व आईपीएस अफसर के एक एनजीओ व कुछ लोगों ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर दी है। इस पत्र में पंजाब सरकार से आग्रह किया है कि यदि नशे के आदी लोगों को अफीम या पोस्त चूरा नियंत्रित तरीके से दिया जाए तो राज्य में नशा कम होगा। उन्होंने कहा कि सिंथैटिक ड्रग्स के कारण नशेड़ी नपुंसक हो रहे हैं। साथ ही अपराध और विवाहितों के तलाक के मामले बढ़ रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि पंजाब कैबिनेट को एनडीपीएस अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और 5 ग्राम अफीम और 500 ग्राम पोस्त चूरा रखने वालों के खिलाफ कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं करना चाहिए। यह उन्हीं को दी जाए, जिनका डाक्टरी मुआयना नशे की लत को प्रमाणित करे और उन्हें लाइसैंस जारी किया जाए। पत्रकार वार्ता में पूर्व आईपीएस इकबाल सिंह गिल, डा द्वारका नाथ कोटनिस हैल्थ एंड एजुकेशन सैंटर लुधियाना के प्रोजैक्ट डायरैक्टर डा इंद्रजीत सिंह व जसवंत सिंह छापा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिंथैटिक ड्रग्स लेता है तो यह शारीरिक और मानसिक रूप से हानिकारक है, लेकिन यह देखा गया है कि यदि कोई नियंत्रित तरीके से अफीम या भुक्की इस्तेमाल करता है तो उसके कोई शारीरिक या मानसिक दुष्प्रभाव नहीं होते।
इसके कारण पंजाब में बलात्कार, चोरी, डकैती, झपटमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि सिंथैटिक ड्रग्स का उपयोग कम होने से राज्य सरकार को नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए दवाओं पर कम खर्च करना होगा और यदि अफीम व भुक्की को देश के अन्य कई राज्यों की तर्ज पर कानूनी रूप से बेचा जाता है तो सरकार सिंथैटिक ड्रग्स की चपेट में आ चुके लोगों को मुख्यधारा की तरफ एक कदम आगे बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व भी कमा सकती है। उन्होंने आग्रह किया कि सभी संबंधित लोगों से विचार-विमर्श और सलाह के बाद सरकार को एक अधिसूचना जारी करनी चाहिए।

 

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