दो सदस्य बैठक का बहिष्कार कर गए फिर भी कॉलेजों के सामने झुक गई कार्यपरिषद, मीडिया को बनाया निशाना
ग्वालियर।
करीब एक करोड़ रुपए की उगाही कर नियम विरुद्ध तरीके से B.Ed कॉलेजों की संबद्धता दिए जाने के आरोपों को लेकर शनिवार को जीवाजी यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में हंगामा भी हुआ औऱ ड्रामा भी। बैठक शुरू होते ही कार्यपरिषद के सदस्य विवेक भदौरिया, शिवेन्द्र सिंह राठौर और प्रदीप शर्मा आदि ने कहा है कि पिछले दिनों बीएड कॉलेज की संबंद्धता को लेकर एक करोड़ रूपये वसूलने के आरोप लगने से हमारे दामन पर दाग लगे हैं । हम अपने आपको निर्दोष होने तक जांच कमेटी की मांग करते हैं। इस पर कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी व रेक्टर प्रो. डीएन गोस्वामी ने कहा कि आरोप लगते रहते हैं, हम मीडिया को नोटिस भेजकर सबूत मांगेंगे, लेकिन जांच कमेटी नहीं बनाएंगे। इस पर सदस्य सहमत नहीं हुए और उन्होंने बाहर आकर कुलपति के कार्यालय के बाहर धरना दे दिया। राज्यपाल कोटे के ईसी सदस्य संजय यादव, सेवंती भगत और संगीता कटारे भी धरने में शामिल हो गये। कुलपति प्रो. तिवारी भी बाहर आए और फर्श पर ही सदस्यों के साथ बैठ गए। उन्हें जांच कमेटी का भरोसा दिलाया और बैठक में ले गए। यह पहला अवसर था जब कुलपति की गरिमा के खिलाफ कुलपति प्रो. तिवारी अपने ही कक्ष के बाहर फर्श पर बैठे। चुनिंदा सदस्यों की मौजूदगी में बैठक में यह तय किया कि आरोपों की जांच रिटायर्ड जज से कराई जाएगी।
दो सदस्य बैठकर छोड़कर चले गए, कॉलेजों को दे दी संबद्धता
दोबारा बैठक शुरू होते ही विवेक भदौरिया और शिवेन्द्र राठौर ने जांच कमेटी की बात कही, जब ऐसा नहीं हुआ तो दोनों सदस्य बैठक छोड़कर चले गए। प्रदीप शर्मा और संजय यादव उनके साथ नीचे तक आए। थोड़ी ही देर में शर्मा और यादव फिर बैठक में शामिल हो गये। बैठक में सामान्य कॉलेजों को भी शैक्षणिक स्टाफ के आधार कार्ड और तीन माह के वेतन का बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने के लिए तीन माह का समय देकर संबद्धता दे दी, जैसा B.Ed कॉलेजों के लिए किया था। जेयू के इतिहास में ऐसे शर्मनाक अवसर बहुत ही कम रहे हैं।
कोयले की दलाली में हाथ काले क्यों करें
खास बात यह रही कि कार्यपरिषद की बैठक में प्रोफेसर, डीन और कॉलेज प्राचार्य भी शामिल हैं लेकिन उनमें से पिछली बैठक और शनिवार को हुई बैठक में तीन सदस्य ही पहुंचे। अन्य सदस्यों ने नाम ने छापने की शर्त पर कहा कि पैसे लेकर ही जब संबद्धता दी जा रही है, ए डबल प्लस यूनिवर्सिटी को कलंकित किया जा रहा है फिर कोयले की दलाली में अपने हाथ काले क्यों करें।

क्या है पूरा मामला
बीएड, लॉ, मैनेजमेंट व सामान्य पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों में निरीक्षण के दौरान बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। कहीं स्टाफ नहीं है तो कहीं लैब, फर्नीचर, लाइब्रेरी नहीं है। अप्रैल में हुई कार्यपरिषद की बैठक में राज्यपाल कोटे के ईसी मेंबरों विवेक भदौरिया व शिवेंद्र राठौर की मांग पर शर्त लगाई कि जब तक कॉलेज संचालक अपने यहां पदस्थ शैक्षणिक स्टाफ का आधार कार्ड और उन्हें दिये जा रहे वेतन का पिछले तीन माह का बैंक स्टेटमेंट नहीं देते तब तक उन्हें संबद्ता नहीं दी जाएगी। इसके लिए कॉलेज संचालकों को तीन अप्रैल तक का समय दिया गया। लेकिन चुनिंदा कॉलेजों ने ही यह दस्तावेज जमा किये। पिछले सप्ताह हुई बैठक में 197 बीएड कॉलेजों को आश्चर्यजनक रूप से दस्तावेज जमा करने के लिए तीन माह का समय दे दिया गया और संबद्धता दे दी। सहमति देने में राज्यपाल कोटे के सभी 6 सदस्य भी शामिल हो गए। इसमें आरोप लगे कि जेयू ने प्रत्येक कॉलेज से 70-70 हजार रुपए वसूले हैं। करीब एक करोड़ रुपए की वसूली की है। इसमें से 2-2 लाख रुपए राज्यपाल कोटे के सदस्यों को भी दिये हैं। बस, यहीं से मामले तूल पकड़ गया गया है।
विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधि मंडल ने सौंपा ज्ञापन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी कुलपति को ज्ञापन सौंपा। परिषद के प्रदेश सह मंत्री हिमांशु श्रोती ने बताया विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री ने बताया अनियमितता पाए जाने महाविद्यालय को जो संबद्धता दी गई है उस पर जांच समिति गठित की जाए एवं अनियमितता पाए जाने वाले महाविद्यालय की संबद्धता तत्काल समाप्त की जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो विद्यार्थी परिषद उग्र आंदोलन करेगी।












