JU में रजिस्ट्रारः रसूख का खेल

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मलाई और रसूख का पद बन गई है रजिस्ट्रार की कुर्सी

विशेष प्रतिनिधि, ग्वालियर।

जीवाजी यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार का पद रसूख और मलाई का बन गया है। प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बड़े भ्राता डॉ. आनंद मिश्रा ने सत्ता की ताकत के बल पर तीन किस्तों में 10 साल राज किया। बिना प्रशासनिक कैडर के किसी कॉलेज के टीचर का 10 साल तक रजिस्ट्रार रहना इतिहास है।

एक साल पहले कहानी फिर बदली जब प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने अपने करीबी जेयू में बॉटनी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुशील मंडेरिया को रजिस्ट्रार बनवा दिया। लेकिन सत्ता में आपसी टकराहट के चलते वे एक साल में ही हटा दिये गये।

मौका मिलते ही कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी ने प्रशासनिक कैडर के जेयू में डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण चौहान को रजिस्ट्रार का प्रभार दे दिया गया। जब मैं नहीं तो तुम भी नहीं, यह कहावत डॉ. मंडेरिया के दिमाग में उठी और उन्होंने यह पीड़ा अपने मंत्री को सुनाई तो आखिर अरुण चौहान की भी विदाई कर देवी अहिल्या विवि इंदौर में डिप्टी रजिस्ट्रार राजेन्द्र बघेल को जेयू का प्रभारी रजिस्ट्रार बना दिया।

इधर शिक्षक, उधर एसीएस विरोध में

डॉ. आनंद मिश्रा की तरह ही डॉ. मंडेरिया की नियुक्ति भी कैडरविहीन थी, लेकिन डॉ. मिश्रा का जेयू के प्रोफेसर विरोध नहीं कर सके। किंतु डॉ. मंडेरिया की नियुक्ति होते ही जेयू में विद्यार्थी परिषद की विचारधारा से जुड़े शिक्षकों के एक गुट ने अंदरूनी विरोध शुरू कर दिया था। डॉ. मंडेरिया के विरोधी शिक्षकों के गुट को कुलपति प्रो. तिवारी ने साथ दिया, क्योंकि डॉ. मंडेरिया भी जेयू में बॉटनी के शिक्षक हैं और कुलपति भी। दोनों में पटरी नहीं बैठती।

एसीएस ने दिखाई ताकत

एक साल का कार्यकाल पूरा होते ही अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) शैलेन्द्र सिंह ने डॉ. मंडेरिया का कार्यकाल बढ़ाने से मना कर दिया। डॉ. मंडेरिया के पास उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में सत्ता की बड़ी ताकत थी लेकिन विरोधी गुट भारी पड़ गया। इधर मौका देख अरुण चौहान ने प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री व महाराष्ट्र के सह प्रभारी के दरबार में हाजिरी दी और रजिस्ट्रार बन गये। यह बात डॉ. मंडेरिया को खटक गई। आखिर दोनों की लड़ाई में फायदा कुलपति को हो गया। नये रजिस्ट्रार बघेल को जेयू से कभी वास्ता नहीं पड़ा। इसलिए जब तक वे एबीसीडी सीखेंगे तब तक कुलपति की पांचों अंगुलियां घी में रहेंगी।

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