हटाए गए सरकारी वकील अब “महल” के बहाने से कलेक्टर पर दबाव बनाने में जुटे

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विशेष संवाददाता, ग्वालियर।

छह साल बाद लोक अभियोजक (सरकारी वकीलों के मुखिया) विजय कुमार शर्मा की कलेक्टर रुचिका चौहान ने छुट्टी तो कर दी लेकिन फिर से वापस आने के लिए वे “महल” के माध्यम से कलेक्टर पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। विजय शर्मा व 5 अन्य सरकारी  वकीलों का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो गया। विजय कुमार शर्मा के कार्यकाल में करोड़ों रूपये कीमत की सरकारी जमीनों भू-माफियाओं के हाथ पहुंच गई हैं। इसमें शर्मा पर भू-माफियाओं से साठगांठ के आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता संकेत साहू ने शिकायत मुख्यमंत्री तक भेजी है। बिल्लू बादशाह ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसी बीच विजय शर्मा व 5 अन्य एडवोकेट घनश्याम अग्रवाल, शरद भटनागर, धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, मिनी शर्मा और मंजुला त्रिपाठी का भी अपर लोक अभियोजक (एजीपी) का कार्यकाल भी 10 मई को खत्म हो चुका है।

बिल्लू बादशाह की खबर के बाद कलेक्टर ने सभी इन सभी सातों वकीलों का काम अन्य सरकारी वकीलों को सौंप दिया। कलेक्टर को फैसले को गलते बताते हुए विजय कुमार शर्मा व अन्य ने कहा है कि नई नियुक्ति होने से पहले उन्हें हटाया नहीं जा सकता। इस मामले में अब कलेक्टर ने विधि विशेषज्ञों से राय ले रही हैं।

आदेश में साफ लिखा 10 मई तक

सरकार ने विजय कुमार शर्मा व अन्य 6 वकीलों का विधि एवं विधायी कार्य विभाग मप्र शासन के सचिव श्रीवास्तव ने 10 मई 2021 को एक ही आदेश निकाला था जिसमें साफ लिखा है कि उनकी नियुक्ति तीन साल या 62 साल की उम्र, जो भी पहले हो तब तक के लिए है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि सरकार चाहे तो कार्यकाल से पहले भी उन्हें हटा सकती है। इस तरह से देखें तो सरकार का कोई आदेश न आने तक कलेक्टर का फैसला ही मान्य रहेगा। ऐसी स्थिति में सभी सातों वकील सरकार की ओर से पैरवी नहीं कर सकेंगे। चूंकि विजय कुमार शर्मा 2019 से ही लोक अभियोजक है  महल से जुड़े होने के कारण ऊंची पहुंच रखते हैं इसलिए हटाये जाने पर वे  “महल“ के दम पर फिर आने की जुगत लगा रहे हैं।

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