-फूलबाग में श्रीरामकथामृत का चतुर्थ दिवस
ग्वालियर।
मनुष्य कर्म बंधनों में कैद है। वो मैं और मेरा के बंधन में जकड़ा हुआ है। मान अपमान राग द्वेष जीवन बंधन है। यही संसार है, जिसमें हम फंसे हुए हैं। संसार मगरमच्छ की पकड़ जैसा है। इस पकड़ से मुक्त होना कठिन है। यह विचार साध्वी दीपिका भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा फूलबाग में आयोजित हो रही श्रीरामकथामृत के चतुर्थ दिवस व्यक्त किए। इस मौकेे पर मंच पर आशुतोष महाराज के संगीतज्ञ शिष्य-शिष्याओं द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण भजनों को सुन सभी श्रद्धालु झूम उठे।

भव्य कथा पांडाल मेें हजारों श्रोताओं को संबोधित करते हुए देवी दीपिका भारती ने कहा कि मेरी पत्नी, मेरे बच्चे, ये भाव बंधनों का आधार है। ये बंधन का भाव बहुत गहरा है। उन्होंंने कहा कि अपने ही कर्मों के कारण मनुष्य सुख और भोग रहा है। गुरू की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु शब्द की पौराणिक गरिमा को समाज ने विस्मृत कर दिया है, जबकि वेद कालीन ऋ षियों से लेकर कलयुगीन महापुरुषों ने गुरु तत्व का अनेकों प्रकार से महिमामयी व्याख्यान किया है। स्कंध पुराण का एक अध्याय तो गुरु महिमा को ही समर्पित है।

गुरु गीता कहलाये जाने वाले इस अध्याय में भगवान् शिव स्वयं मां पार्वती के समक्ष गुरु शब्द को परिभाषित करते हुए कहते हैं गुरु का अर्थ होता है अन्धकार और गुरु यानि प्रकाश। वह सत्ता जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है और व्यक्ति के जीवन से अज्ञान का नाश कर देती है।
भगवान श्रीराम के वनगमन का प्रसंग लेते हुए श्रीराम को साम्यावस्था के आदर्श बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में अक्सर हम सही और ग़लत के चुनाव में द्वंद्व में फंस जाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम एक आध्यात्मिक सूर्य हैं, जिनका उदय तो हर युग में भारत होता है परन्तु उनके स्वर्णिम प्रकाश की आभा समस्त विश्व को प्रकाशित करती है, क्यूंकि यदि विश्व एक देह है तो भारत उसका ह्रदय है। 8 जून को बाली वध, तारा उद्धार एवं सुंदरकांड प्रसंग का वर्णन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति अच्छा दिखने वाले यानि प्रेय और वास्तव में अच्छे यानि श्रेय मार्ग के अंतर को भलीभांति समझ कर श्रेय का ही चयन करते हैं; परन्तु साधारण जन प्रिय दिखने वाले मार्ग को ही सही समझ कर उसी पर चल पड़ते हैं। श्रेय पर चलने वाले अपने जीवन को महँ बना लेते हैं परन्तु प्रेय पर चलने वाले पतन की ओर बढ़ जाते हैं। क ैकेयी को इसी मतिभ्रम की शिकार बातकर कथाव्यास ने पूर्ण सतगुरु द्वारा प्रदत्त अध्यात्म ज्ञान को इस द्वंद्व का समाधान बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीराम एक आध्यात्मिक सूर्य हैं जिनका उदय तो हर युग में भारत में ही होता है परन्तु उनके स्वर्णिम प्रकाश की आभा समस्त विश्व को प्रकाशित करती है. क्यूंकि यदि विश्व एक देह है तो भारत उसका ह्रदय है। उन्होंने बताया कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के लिए न केवल बड़ी संख्या में भव्य श्रीमद भागवद कथा, श्रीमद देवी भागवद कथा, श्री रामकथा, शिव कथा, हरी कथा, कृष्ण कथा तथा गौ कथा का आयोजन कर रहा है बल्कि इनमें जिस सनातन पुरातन ब्रह्मज्ञान की चर्चा की गयी है, जिज्ञासु जनों को वह भी प्रदान किया जाता है।
इस मौके पर परमार्थ आश्रम के समरतीर्थ महाराज, ज्योतिषाचार्य गिरार्जशरण शर्मा, नूतन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा, रमन शर्मा, दशरथ सिंह भदौरिया, आयोजन अध्यक्ष रचना राजेश सोलंकी, अजीत बरैया सहित हजारों श्रोता मौजूद रहे।












