JU: बीएड कॉलेजों से एक करोड़ तो सामान्य पाठ्यक्रम वाले कॉलेजों से पचास लाख वसूले

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ईसी मेंबरों ने एक-दूसरे पर लगाए पैसे लेने के आरोप

हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।

बीएड कॉलेजों से एक करोड़ रुपये से ज्यादा रकम वसूलकर संबद्धता देने के आरोपों से ए डबल प्लस की ग्रेड वाले जीवाजी विश्वविद्यालय को प्रदेश भर में बदनाम कर दिया है। शर्तें पूरी करने के लिए 197 बीएड कॉलेजों को सोमवार को हुई बैठक में आश्चर्यजन रूप से तीन माह का समय देने के मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। बदनाम होते ही कार्यपरिषद सदस्य अब एक-दूसरे पर पैसे लेने के आरोप लगा रहे हैं। अभी लॉ, मैनेजमेंट और सामान्य पाठ्यक्रम संचालन करने वाले कॉलेजों को संबद्धता नहीं दी है। जेयू में मंगलवार को तेजी से यह चर्चा फैली कि इन कॉलेजों को भी समय देने के लिए प्रत्येक कॉलेज से 50 हजार रुपए वसूलने की योजना बनाई गई है। इन कॉलेजों से 50 लाख रुपए वसूलने का लक्ष्य रखा गया है। सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि जब 8 मई की बैठक में B.ed कॉलेजों को 3 महीने का समय दे दिया गया तो सामान्य पाठ्यक्रम वालों को समय क्यों नहीं दिया गया ?? सूत्रों के अनुसार प्रत्येक कार्यपरिषद सदस्य ने इसके लिए 50-50 हजार रुपये और मांगे हैं।

अधिकारी मौन, साख बचाने में जुटे ईसी मेंबर

राज्यपाल कोटे से शिवेन्द्र सिंह राठौर, विवेक भदौरिया, प्रदीप शर्मा और आरक्षित वर्ग से सेवंती भगत, संगीता कटारे व संजय यादव ईसी मेंबर बनाए गए हैं। 28 फरवरी को हुई कार्यपरिषद की बैठक में ईसी मेंबर शिवेन्द्र और विवेक भदौरिया ने कहा था कि सभी बीएड कॉलेजों से उनके यहां पदस्थ शैक्षणिक स्टाफ के आधार कार्ड और पिछले तीन माह का वेतन देने का बैंक स्टेटमेंट नहीं आ जाता तब तक उन्हें संबद्धता नहीं दी जाए। इस पर सभी सदस्य सहमत हो गये थे और कॉलेजों को यह दस्तावेज जमा करने के लिए चार दिन का समय दिया था। लेकिन अचानक बैठक बुलाई और कॉलेजों को संबद्ता दे दी। इसमें चर्चा चल निकली कि प्रत्येक कॉलेज से 70 हजार रुपए लिये हैं। आग किबतकरह हवा फैली कि रेक्टर प्रो. डीएन गोस्वामी को करीब एक करोड़ मिले हैं।  इसमें से राज्यपाल कोटे के प्रत्येक सदस्य तो दो-दो लाख रुपए दिये गए हैं। यह चर्चा फैलने के बाद प्रदेश भर में जेयू की बदनामी हुई है। बैठक के बाद कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी छुटटी पर चले गए हैं तो रेक्टर प्रो. डीएन गोस्वामी इन आरोपों पर मौन साध गये हैं। वे बात नहीं कर रहे और मैसेज का जवाब नहीं दे रहे।

इनका कहना है

मैंने और विवेक भदौरिया ने नहीं अन्य चार सदस्यों ने पैसे लिये हैं। हम तो विवि में चल रही गड़बड़ी रोकने आए हैं। संजय यादव ने कहा था कि कॉलेजों को छह माह का समय दे दो, तब हमने तीन माह का समय दिया।

शिवेन्द्र सिंह राठौर, ईसी मेंबर

-शिवेन्द्र और मैं विवि में समय देने को तैयार नहीं थे। हमारे अन्य चार सदस्य जब आश्चर्यजनक रूप से पलट गए तब हम सहमत हुए। हमने किसी से पैसे नहीं लिये। सुनने में आया है कि जेयू अधिकारियों और दूसरे सदस्यों ने पैसे लिये हैं।

विवेक भदौरिया, ईसी मेंबर

-मुझे पैरालिसिस अटैक पड़ा है। विवेक और शिवेन्द्र के कहने पर ही बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा था कि तीन माह का समय दे दो। चूंकि हम विवि की इस तरह की नीतियों को अभी ठीक से समझ नहीं सके हैं, इसलिए शिवेन्द्र और विवेक की बातों पर भरोसा कर लेते हैं। सेवंती बहन, संगीता कटारे और मैं तो आरएसएस से जुड़े हैं। हमारे संस्कार पैसे लेने वाले नही हैं।

संजय यादव, ईसी मेंबर

-शिवेन्द्र और विवेक सिंह ने करीब बीस कॉलेजों से समझौता कर लिया है। हमारे कोई कॉलेज नहीं है और न ही कॉलेजों से संपर्क है। दोनों के कहने पर ही मैं तीन माह का समय देने पर सहमत हुई।

संगीता राजेश कटारे, ईसी मेंबर

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