एक नम्बर लाइन में नानी बाई को मायरो आरंभ
पहले ही दिन उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़,
श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, छोटा पड़ा कथा पांडाल
ग्वालियर – गुरू पुर्णिमा के पावन पर्व पर ग्वालियर विधानसभा के लाइन नम्बर एक में सोमवार को आरंभ हुई नानी बाई को मायरो कथा में विश्वविख्यात प्रवचनकार जयाकिशोरी ने कहा कि जीवन में गुरू अवश्य बनाएं, यदि आपने गुरू नहीं बनाया तो तो श्रीकृष्ण को ही अपना गुरू मान लो,तो आपके जीवन का कल्याण हो जाएगा। कथा क े आरंभ में आयोजक मीतेंद्र दर्शन सिंह ने ठाकुरजी का पूजन किया। कथा के दौरान पूरे समय भक्त जयाकिशोरी के मीठे भजनों पर मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करते रहे।

विशाल पांडाल में हजारों श्रद्धालु श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबको पता है कि हमें अंत में भगवान के पास जाना है। यह बात हम जितनी जल्दी समझ लें, उतना अच्छा है,लेकिन भगवान के चरणों की भक्ति करना इतना आसान नहीं हैं। हम जितना भगवान में मन लगाते हैं तो उतना ही वह उचटता है,लेकिन जिसको एक बार प्रभु क ी लगन लग जाती है तो फिर उसे कुछ और नहीं सूझता है, ऐसे ही थे भक्त नरसी।
वे गूंगे बहरे पैदा हुए,लेकिन उसकी भक्ति ऐसी थी कि रास्ते में कहीं भगवान का कीर्तन सुनाई दे जाए तो वहीं बैठकर मग्न हो जाते थे। जन्म से गूंगे होने के बाद भी वे भगवान की कृपा से राधे-कृष्ण बोलने लगे तो सभी चकित रह गए। जो भक्त भगवान पर भरोसा करते हैं, भगवान उनके सभी कष्ट दूर कर देते हैं। 

बच्चों को बचपन से दें संस्कार…..
जया किशोरी ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही संस्कार दें। यदि आप यह सोचते हैं कि वे समझदार हो जाएंगे तब उन्हें संस्कार की बातें बताएंगे तो यह आपकी भूल होगी,क्योंकि बच्चे जब समझदार हो जाते हैं और आप उन्हें कुछ समझाना चाहते हैं, तो फिर वे आपको समझदार नहीं समझते हैं, इसलिए बचपन से ही उन्हें अच्छी बातें सिखाएं ताकि वे सीख लेकर संस्कारित हो सकें।
भगवान क ो भूलना आधुनिकता नहीं…..
आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूलते जा रहे युवाओं से उन्होंने कहा कि आधुुनिकता के नाम पर इतने आगे मत बढ़ जाओ कि आगामी पीढ़ी आपसे पूछे कि राधा-कृष्ण कौन हैं। नई चीजें सीखने एवं उनका अनुशरण करना बुरी बात नहीं हंैं,लेकिन हमें अपनी पुरातन पंरपराओं को भी सहेजना होगा। मॉर्डन होने का अर्थ यह नहीं है कि हम भगवान को ही भूल जाएं।
उन्होने कहा कि कथा भागवत और संत्संग में जाएं तो कुछ अच्छी बातें अवश्य लेकर आएं, अन्यथा वहां जाने का कोई लाभ नहीं हैं। कथा भागवत में लोग आते हैं तो भक्ति केे वातावरण से उनका भाव जरूर बदलता है,लेकिन कथा पांडाल से निकलते ही सबकुछ भूल जाते हैं। हमें यह स्थिति बदलनी होगी। क था में से कुछ न कुछ अपने लिए जरूर बचाकर रखें, जिससे आपके जीवन मेें सकारात्मक बदलाव होगा।
जयाकिशोरी की पहले ही दिन की कथा में भक्तों में इतने उत्साह दिखाई दिया कि पांडाल छोटा पड़ गया, जिसकी वजह से विशाल मैदान के चारों ओर खड़े होकर भी श्रद्धालुओं ने कथा सुनी। यह देख कथा आयोजक मीतेंद्र दर्शन सिंह ने घोषणा की कि आगामी दो दिन की कथा के लिए पांडाल को और बड़ा किया जाएगा,ताकि श्रद्धालु आराम से बैठकर कथा सुन सकें।
इस मौके पर वीर सिंह तोमर, कल्लू दीक्षित, वीर सिंह यादव, सरमन राय, रामनरेश परमार, घनश्याम घुड़सेले, आकाश तोमर, हेवरन कंसाना, रविंद्र यादव, जहान सिंह तोमर, पप्पन यादव सहित हजारों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।












