चेतकपुरी सड़क में भी सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, प्राइवेट लैब का रिकॉर्ड तलब

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प्राइवेट लैब से ही कर ली जांच उठे सवाल अब 21 को होगी सुनवाई 

DPR में सरकारी लैब की रिपोर्ट नहीं, निजी लैब की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल; गड्ढों में मलबा भरकर ऊपर डाली गई बिटुमिन की पतली परत पर कोर्ट ने मांगा जवाब

ग्वालियर।

ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सड़क निर्माण और पैचवर्क को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चोपाटी तक सड़क से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट में कई नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं, सड़क निर्माण से संबंधित DPR में सरकारी लैब की टेस्ट रिपोर्ट नहीं मिलने और अधिकांश रिपोर्ट निजी लैब से होने की बात भी सामने आई है।

कैलाश चंद अग्रवाल बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले में 18 सितंबर 2026 को पारित आदेश में न्यायालय ने सैंपल रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि कई नमूनों में बिटुमिन कंटेंट, बल्क डेंसिटी, बाइंडर कंटेंट और ग्रेडिंग से संबंधित परीक्षणों में खामियां पाई गईं। कुछ नमूनों में CRM भी नहीं पाया गया। वहीं कुछ स्थानों के रिकॉर्ड में अर्थवर्क नहीं किए जाने की बात सामने आई।

DPR में सरकारी लैब की रिपोर्ट नहीं मिली

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अधिकांश DPR में सरकारी लैब से प्राप्त टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। अधिकतर रिपोर्ट Rajnandini Enterprise & Consultancy नामक निजी लैब से प्राप्त होने की बात कही गई है। इसके अलावा इन रिपोर्टों में सैंपल लिए जाने की जगह का उल्लेख भी नहीं था।

Job Mix Design की तारीख पर भी सवाल

हाईकोर्ट के समक्ष रखी रिपोर्ट में Job Mix Design की तारीख को लेकर भी महत्वपूर्ण विसंगति बताई गई। DPR के अनुसार Job Mix Design 16 सितंबर 2024 को तैयार किया गया था, जबकि DBM और BC सैंपलों की रिपोर्ट के अनुसार सैंपल 10 जुलाई 2024 को लिए गए और उनकी रिपोर्ट 11 जुलाई 2024 की है।

यानी सैंपल लिए जाने और उनकी रिपोर्ट तैयार होने के दो महीने से अधिक समय बाद Job Mix Design तैयार किया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित रिकॉर्ड की जांच के लिए Rajnandini Enterprises and Consultancy से मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।

नगर निगम आयुक्त को मूल रिकॉर्ड पेश कराने के निर्देश

हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे न्यायालय के आदेश से Rajnandini Enterprises and Consultancy को अवगत कराएं और कंपनी से संबंधित मूल रिकॉर्ड प्राप्त कर अगली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष पेश करें।

न्यायालय ने विशेष रूप से 11 जुलाई 2024 की बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट और 16 सितंबर 2024 की डिजाइन मिक्स/DBM रिपोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है।

गड्ढों की मरम्मत में भी सामने आई तस्वीर

मामले में ग्वालियर नगर निगम और M/s Grams Infratech (India) Private Limited के बीच सड़क के प्री-मानसून, मानसून और पोस्ट-मानसून रखरखाव के अनुबंध का भी उल्लेख किया गया है। अनुबंध के अनुसार गड्ढों से मलबा और ढीली सामग्री हटाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनकी मरम्मत की जानी है।

लेकिन नगर निगम द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए फोटो में आयोग द्वारा सैंपल लेने के लिए खोदे गए गड्ढों की मरम्मत को लेकर न्यायालय ने सवाल उठाए। आदेश के अनुसार फोटो में गड्ढों में मलबा भरने और उसके ऊपर बिटुमिन की पतली परत डालने की स्थिति दिखाई दी।

कोर्ट ने कहा कि नगर निगम द्वारा प्रस्तुत फोटो ही इस बात को दर्शाते हैं कि गड्ढों की मरम्मत निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं की गई।

नगर निगम आयुक्त से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने नगर निगम ग्वालियर के आयुक्त से जवाब मांगा है कि आयोग द्वारा खोदे गए गड्ढों को निर्धारित तकनीकी specifications के अनुसार क्यों नहीं भरा गया और उनमें मलबा भरकर उसके ऊपर बिटुमिन की पतली परत क्यों डाली गई।

आयुक्त को अगली सुनवाई में इस संबंध में जवाब और शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि नगर निगम वे सभी तकनीकी specifications पेश करे, जिनके आधार पर गड्ढों को मलबे से भरकर ऊपर बिटुमिन की पतली परत डाले जाने को उचित ठहराया जा सके।

21 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान आयोग द्वारा बचे हुए दो सैंपलों की रिपोर्ट पेश की जानी है। साथ ही नगर निगम आयुक्त का शपथपत्र भी विचार के लिए आएगा।

हाईकोर्ट के इस आदेश से ग्वालियर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, DPR में दर्ज परीक्षण रिपोर्ट और मानसून के दौरान किए गए पैचवर्क की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हुए हैं।

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