आमखो बस स्टैंड की जमीन सरकारी घोषित, कलेक्टर के खिलाफ कंटेंप्ट पिटिशन खारिज, तोड़े जाएंगे मकान

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तहसीलदार मनीष जैन के प्रयास रंग लाये, कंटेप्ट पिटिशन 606/2025 निर्मला सिकरवार विरुद्ध रुचिका चौहान मामले में फैसला

ग्वालियर की तहसील लश्कर के ग्राम शहर लश्कर के सर्वे क्रमांक 1817 में स्थित आमखो बस स्टैंड की भूमि सर्वे क्रमांक 1817/1 रकबा 11 विस्वा का स्वामित्व माननीय सर्वोच्च न्यायालय से प्राप्त करने के बाद पजेशन हेतु बटाकंन के लिए प्रयासरत भूमाफियों को एक बार फिर मुंह की खानी पडी है। कंटेप्ट प्रकरण प्रचलित होने के बावजूद तकनीकी आधार पर बटाकंन किये जाने में तहसीलदार लश्कर मनीष जैन ने बटाकंन किये जाने में असमर्थता बताई और कंटेंप्ट पिटीशन क्रमांक 606/2025 को डिस्पोजस्ड आफ कराने में सफल रहे जिससे आम खो बस स्टैंड स्थित यह बेशकीमती शासकीय भूमि फिलहाल भूमाफियाओं के हाथ में जाने से बच गई है। इसके साथ ही सर्वे क्रमांक 1817 में अवैध अतिक्रमण कर बनाये गये लगभग 300 मकानों के भवन मालिकों को बेदखल कर भवन तोडे जाने का रास्ता भी साफ हो गया है। तहसीलदार लश्कर मनीष जैन न बताया कि उक्त शासकीय सर्वे न0 1817 में अतिक्रमणों की पहचान करने के लिए दल बना दिया गया है जो एक सप्ताह में जाँच कर रिपोर्ट पेश करेगा और उसके आधार पर संबंधित अतिक्रामकों को नोटिस जारीकर बेदखली की प्रक्रिया प्रारंभ की जावेगीl इस हेतु वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासन स्तर से निर्देश प्राप्त हो चुके हैं।

हाईकोर्ट के 3 दिसंबर 2024 के आदेश का प्रशासन ने पर्याप्त रूप से पालन किया है। कोर्ट ने कलेक्टर ग्वालियर को अपर आयुक्त के 14 मार्च 2023 के आदेश के अनुसार जांच और आगे की कार्रवाई करने को कहा था। कलेक्टर ने मामले को तहसीलदार लश्कर को भेजा, जिन्होंने जांच के बाद 8 मई 2026 को विस्तृत आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जमीन का बटांकन/बटांकन की एंट्री राजस्व रिकॉर्ड में होनी चाहिए थी और प्रशासन ने सही पालन नहीं किया। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अपर आयुक्त के आदेश में पहले जांच करने और जांच के परिणाम के आधार पर आगे कार्रवाई करने के निर्देश थे। इसलिए प्रशासन द्वारा जांच कर आदेश पारित करना पर्याप्त अनुपालन है। कोर्ट ने तहसीलदार के 8 मई 2026 के आदेश की वैधता या सही-गलत पर फैसला नहीं दिया। आदेश में स्पष्ट है कि इस अवमानना कार्यवाही में उस आदेश की शुद्धता की जांच करना कोर्ट के सामने मुद्दा नहीं है। कोर्ट को प्रशासन की तरफ से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण अवहेलना (wilful and deliberate non-compliance) नहीं मिली। इसलिए कोर्ट ने कहा कि Contempt Petition में आगे कार्यवाही का कोई आधार नहीं बनता। अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया गया और Rule Nisi discharged कर दिया गया। हालांकि, यदि याचिकाकर्ता अभी भी तहसीलदार के 8 मई 2026 के आदेश से असंतुष्ट हैं, तो कोर्ट ने कहा कि वे कानून के तहत उपलब्ध अन्य उचित उपाय अपना सकती हैं। सबसे अहम बात हाईकोर्ट ने यह नहीं कहा कि तहसीलदार का जमीन संबंधी फैसला सही है। कोर्ट ने केवल यह माना कि उसके पुराने आदेश का प्रशासन ने पर्याप्त पालन कर दिया है, इसलिए कलेक्टर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई नहीं बन सकतीl

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