ग्वालियर की सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त: सैंपलिंग से पहले रोड की मरम्मत पर नाराज, निगम आयुक्त का मोबाइल तलब

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बिल्लू बादशाह न्यूज ब्रेक्रिंग
ग्वालियर। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए वैज्ञानिक तरीके से सैंपल लेने और संबंधित सड़कों की DPR व Measurement Book की जांच के निर्देश दिए। इसी दौरान जिस रोड बेटी बचाओ तिराहा से गुढ़ी गुढ़ा का नाका तक सड़क का सैंपल लिया जाना था, उसकी अचानक मरम्मत शुरू होने पर कोर्ट ने नगर निगम के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। हाई कोर्ट में यह मामला  कैलाश चंद अग्रवाल बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य से संबंधित याचिका पर विचाराधीन है। जस्टिस जीएस आहुलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की अदालत ने यह आदेश दिये हैं। याची की ओर से पैरवी एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर कर रहे हैं।


चार-चार सैंपल लिए जाएंगे
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आयोग प्रत्येक चयनित स्थान से चार सैंपल लेगा। सभी सैंपल मौके पर ही SSP ग्वालियर कार्यालय की मुहर वाली मोम की सील से सीलबंद किए जाएंगे। एक सैंपल PWD Testing Lab और दूसरा Rural Engineering Service Testing Lab भेजा जाएगा। तीसरा सैंपल जिला न्यायालय ग्वालियर के मालखाने में सुरक्षित रहेगा, जबकि चौथा नगर निगम आयुक्त की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर तीसरे सैंपल को देश की किसी प्रतिष्ठित प्रयोगशाला में भेजकर दोनों सरकारी लैब की रिपोर्ट का क्रॉस-चेक कराया जा सकता है।
DPR और Measurement Book छिपाने पर चेतावनी
नगर निगम, PWD और NHAI को उन सड़कों की DPR और Measurement Book उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जहां से सैंपल लिए जाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम ने रिकॉर्ड छिपाने या दूसरी सड़क के दस्तावेज देने की कोशिश की तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बाढ़, आग या किसी अन्य बहाने से मूल रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाना रिकॉर्ड नष्ट करने का प्रयास माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
निजी लैब पर दबाव की बात सामने आई
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि एक निजी लैब के संचालक ने कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोगों के दबाव में सड़क की जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद चौंकाने वाला बताया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक ओर ग्वालियर के निवासी खराब सड़कों की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग व्यापक जनहित के खिलाफ काम कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों के बारे में ग्वालियर की जनता को फैसला करना है।
रोड नंबर-7 की मरम्मत पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान आयोग ने कोर्ट को बताया कि रोड नंबर-7, बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा-गुड़ी का नाका की मरम्मत शुरू कर दी गई है, जबकि इसी सड़क से सैंपल लिए जाने थे।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से फोटो और वीडियो कोर्ट के सामने रखे गए। नगर निगम के अधिवक्ता ने भी माना कि मौके पर भारी मशीनें काम कर रही थीं। कोर्ट के सामने यह बात भी आई कि सड़क की ऊपरी परत हटाकर दोबारा निर्माण किया जा रहा था।
कोर्ट ने नगर निगम के इस आचरण को “बेहद आपत्तिजनक” बताया।
आयुक्त बोले- Instagram वीडियो देखकर दिए WhatsApp निर्देश
शाम को नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि उन्हें देवाश शिवहरे द्वारा Instagram पर रोड नंबर-7 की खराब हालत का वीडियो मिला था।
आयुक्त के अनुसार उन्होंने सुबह 9:01 बजे वीडियो देखा और 9:02 बजे संबंधित अधिकारी को WhatsApp पर निर्देश भेजा—“इसके गड्ढे भरवाओ, मोटरेबल करवाओ।”
इसके बाद उन्होंने GSB डालकर सड़क को चलने लायक बनाने के निर्देश दिए। ठेकेदार को भी मौके पर काम करने के लिए कहा गया।
आयुक्त के मोबाइल में मौजूद फोटो और वीडियो भी कोर्ट को दिखाए गए। इनमें JCB और रोड रोलर से सड़क पर काम होता दिखाई दिया।
कोर्ट ने पूछा- WhatsApp पर सरकारी आदेश की अनुमति है?
कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से पूछा कि क्या राज्य सरकार ने सरकारी कार्यों के लिए WhatsApp के माध्यम से निर्देश जारी करने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब सड़क पिछले एक साल से खराब थी तो उसी समय अचानक मरम्मत क्यों कराई गई, जब आयोग पहले ही इस सड़क को सैंपल लेने के लिए चयनित कर चुका था। यदि तत्काल मरम्मत जरूरी थी तो कोर्ट से पहले अनुमति क्यों नहीं ली गई?
एक फुट तक ऊपरी परत हटाने की बात स्वीकार
इंजीनियरों से जानकारी लेने के बाद आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि सड़क की ऊपरी परत करीब एक फुट की गहराई तक हटाई गई और इसके बाद सड़क का पुनर्निर्माण किया गया।
इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि रोड नंबर-7 का सैंपल लेते समय ऊपर की एक फुट परत को छोड़कर उसके नीचे से सैंपल लिया जाए।
मोबाइल में मौजूद रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
कोर्ट ने आयुक्त को निर्देश दिया कि उनके मोबाइल में मौजूद सभी फोटो, वीडियो, रिपोर्ट और WhatsApp निर्देशों को डिलीट या उनमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाए।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई तो मोबाइल जब्त किया जा सकता है। आयुक्त को 18 अगस्त को अपना मोबाइल कोर्ट के सामने उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है।
19 अगस्त को ही लिया जाएगा सैंपल
पहले नगर निगम के अनुरोध पर रोड नंबर-7 से सैंपल लेने की तारीख 19 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की गई थी। लेकिन सड़क में बदलाव किए जाने के बाद कोर्ट ने यह निर्णय वापस ले लिया।
अब रोड नंबर-7, बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा-गुड़ी का नाका से 19 अगस्त 2026 को ही सैंपल लिया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को होगी।
कोर्ट के आदेश से जांच का दायरा हुआ और सख्त
इस आदेश से साफ है कि हाईकोर्ट ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर चल रही जांच को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है। सड़क के नमूनों के साथ निर्माण की DPR, Measurement Book, खर्च की गई राशि और मौके की जियो-टैग तस्वीरों की भी जांच होगी। साथ ही कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सैंपल लिए जाने से पहले सड़क की स्थिति में बदलाव कर जांच को प्रभावित न किया जा सके।

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