माननीयों के यहां सेवाएं दे रहे हैं निगम के कर्मचारी

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आउटसोर्स घोटाला व्यापम जैसा है , लेकिन कार्रवाई के नाम पर नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल चुप्पी साधे हैं।

ग्वालियर

नगर निगम में आउटसोर्स भर्ती घोटाला भले ही व्यापम जैसा हो लेकिन जब इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष मिल बैठकर रसमलाई खाए तो फिर जांच कौन करेगा।
3 साल पहले फर्जी भर्ती का मामला उजागर होने पर तत्कालीन निगमायुक्त संदीप माकिन ने तो परिषद की भरी बैठक में कह दिया था कि माननीयो के कहने पर कर्मचारी जब लगाए जाएंगे तो फिर कौन हटा सकेगा ?
वर्तमान निगमायुक्त किशोर कन्याल को भी मार्च-अप्रैल में बता दिया था कि कितना बड़ा घोटाला है। उन्हें यह भी पता था कि माननीयों की सेवा में निगम से वेतन ले रहे कितने सेवादार लगे हैं, फिर भी उनकी चुप्पी रहस्यमयी रही।
माननीयों को अनऑफिशियल दे रहे सेवा
-एक मंत्री के लगे निगम के कर्मचारियों की संख्या *25*

-दूसरे मंत्री के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *18*
-एक विधायक के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *8*
-दूसरे विधायक के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *4*
-एक सांसद के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *9*
-एक पूर्व विधायक के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *11*
-14 पार्षदों के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *20*
– रिटायर्ड हो चुके अधिकारियों के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *17*
-जिला प्रशासन के अधिकारियों के यहां लगे निगम के कर्मचारियों की संख्या *15*
-निगम के अपात्र अधिकारियों के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *44*
-दूसरे विभागों के उच्च अधिकारियों के यहां लगे कर्मचारियों की संख्या *22*
*नोट* : कागजों में ये सभी कर्मचारी निगम के कार्यालयों में पदस्थ दिखाए जाते हैं, इसीलिए वेतन नगर निगम के खजाने से ही जनता के टैक्स के पैसे से जा रहा ।
निगमायुक्त को मार्च, अप्रैल में ही यह जानकारी दे दी थी, लेकिन उनका मौन रहना आश्चर्यजनक था।

सवाल :ऐसे में क्या आउटसोर्स घोटाले की जांच हो पाएगी

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