आधे शहर को मिला गंदा पानी, निगमायुक्त बोले- इंजीनियर नासमझ थे

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हरीश चन्द्र कुशवाह

ग्वालियर।

पिछले दो दिन से आधे शहर में गंदा पानी सप्लाई किया गया। बीमारी के भय से लोगों में त्राहि-त्राहि मच गई। जब नगर निगम आयुक्त किशोर कान्याल व पीएचई को नोडल अधिकारी आरएलएस मौर्य से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि 56 करोड़ का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने वाली फर्म के इंजीनियर नासमझ थे। उन्हें ट्रेनिंग दे दी गई है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही क्योंकि उनकी कोई गलती नहीं है।

अमृत योजना में 56 करोड़ का प्लांट, 5 साल तक मेंटेनेंस

केन्द्र सरकार ने 2017 में अमृत योजना के तहत ग्वालियर नगर निगम को 730 करोड़ रुपये स्वीकृत किये थे। इसमें से पानी की टंकी, लाइन बिछाने, ट्रीटमेंट प्लांट बनाने पर 400 करोड़ रुपए खर्च किये गये। जलालपुर पर 56 करोड़ की लागत से 160 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया। पानी का पूरा प्रोजेक्ट मैसर्स आर पुंगलिया के पास था। जनवरी से इसी प्लांट का पांच साल का ऑपरेशन एंड मेंटनेंस का काम भी इसी फर्म को सौंपा गया है। पिछले दो दिन में आधे शहर को गंदा पानी सप्लाई किया गया।

आयुक्त बोले- नेगेटिव मानसिकता न रखें

आयुक्त व नोडल अधिकारी से जब पूछा कि प्लांट का मेंटेनेंस करने वाली फर्म को वहां प्रशिक्षित व योग्य इंजीनियर रखना चाहिये। क्योंकि गंदे पानी से त्राहि-त्राहि मच गई है। जनता में भय पैदा हो गया है। इस पर आयुक्त कान्याल व नोडल अधिकारी मौर्य ने कहा कि गलती सभी से होती है। कोई पहले से सीखकर नहीं आता। ज्यादा नेगेटिव नहीं होना चाहिये। हमारे पीएचई के इंजीनियरों ने प्लांट पर जाकर व्यवस्थाएं ठीक कर दी हैं। अब गंदा पानी नहीं आएगा। जब अधिकारियों से सवाल पूछा कि इस गलती के लिए फर्म के इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई की जा रही है या नहीं, तो उन्होंने कहा कि उनकी कोई गलती नहीं है। इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अनुत्तरित सवालः

1-यदि किसी व्यक्ति को ट्रक चलाने का अनुभव नहीं है और उसे ट्रक थमा दिया जाता है। वह किसी दुर्घटना को अंजाम देता तो क्या उसे बिना कार्रवाई के छोड़ा जा सकता है।

2-यदि अयोग्य इंजीनियर पुल का निर्माण करते हैं और पुल भरभराकर गिर जाता है जिसमें कुछ लोगों की मौत हो जाती है, तो क्या इंजीनियरों को बगैर कार्रवाई के छोड़ा जा सकता है।

जब निगमायुक्त किशोर कान्याल से यह सवाल किये गए तो उनका कहना था कि दिमाग में ज्यादा नेगेटिविटी नहीं नहीं होना चाहिये।

इनका कहना है
बारिश के कारण तिघरा बांध से प्लांट में पानी आया था। वह बदबूदार नहीं है। अब पानी को फिल्टर कर दिया है। मैंने स्वयं इसकी मॉनिटरिंग की। इस मामले में जो भी अधिकारी और ठेकेदार लापरवाह हैं और गलती स्वीकार न करते हुए तानाशाही बयानबाजी कर रहे हैं उनके खिलाफ एक्शन लूंगा।
प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री

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