अद्भुत प्रतिभा के धनी थे डॉ. आंबेडकर, समाज के प्रत्येक वर्ग का रखा ध्यानः सोलंकी

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ग्वालियर।

डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते। वे इतने अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी अध्ययन क्षमता का आकलन हम इसी से कर सकते हैं कि लाइब्रेरी में 35000 पुस्तको का संकलन था। वे नियमित अध्ययन करते थे। संविधान बनाने का जब उनको दायित्व मिला तो उन्होंने 60 देशों के संविधान का अध्ययन किया और उसमें उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों की रक्षा कैसे हो सकती है, इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए संविधान में व्यवस्था की। उक्त उद्गार समाजसेवी राजेश सोलंकी ने ग्वालियर की तरुणाई संस्था के तत्वाधान में भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पुण्यस्मरण मैं हस्सू हद्दू खां सभागार रामाजी का पुरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की आसंदी से व्यक्त किए।

सोलंकी ने कहा कि समाज के रचनात्मक विकास में महिलाओं की भूमिका को भी उन्होंने रेखांकित किया। उनका मानना था जब तक किसी देश का पूर्ण विकास नहीं हो सकता जब तक उस देश का युवा एवं महिलाए विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ेगा। डॉ. अंबेडकर ने कृषि के महत्व को भी महत्वपूर्ण बताया और उन्होंने कहा जब तक गांव का गरीब, दलित, किसान आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा तब तक किसी देश को आत्मनिर्भर नहीं कहा जा सकता। उन्होंने संविधान में अधिकार कर्तव्य सारे बिंदुओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया वह बहुत विद्वान व्यक्ति थे उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था और 64 विषयों में उन्होंने स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की। इस अवसर पर प्रोफेसर विशाल कदम, होतम सगर मंचासीन थे। स्वागत भाषण मनीष राजोरिया ने दिया कार्यक्रम का संचालन गब्बर जाटव ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों का समाज सेवा का कार्य कर रहे 25 विभूतियों का सम्मान भी किया गया। इसमें रोशन लाल, अमर सिंह जाटव मिट्ठू लाल,हरिराम गुलरिया, जय नारायण जरेनीया, श्रीमती उषादेवी शाक्य ,मांगीलाल  सुनीता गौतम, गंगाराम, राम किशन मिथोरिया,राजाराम बाल्मिक, श्यामलाल दंडोतिया, रामजीलाल भगत, रमेश पांडे, प्रमोद चौहान, अनिल शर्मा पत्रकार, शिवप्रसाद, वृंदावन कोठारी ,इसरार हुसैन ,ओमप्रकाश आदि शामिल रहे।

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