शिवराज सरकार ने प्रदेश की जनता को लूट डाला: तिवारी

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ग्वालियर
प्रमोद तिवारी, सांसद, उप नेता, राज्य सभा ने मध्य प्रदेष की ‘‘शिवराज सरकार’’ के कार्यकाल में जनता को कैसे लूटा जा रहा है और उसको कैसे भ्रमित किया जा रहा है तथा किस तरह उसको अंधेरे में रखकर उसे धोखा दिया जा रहा है इसकी एक बानगी पेष करते हुये कहा है कि:-\

1. भाजपा का माफिया राज – उद्योगों की न कोई आस

पिछले 18 वर्षों में मध्यप्रदेश में भारतीय जनतापार्टी ने कई तरह के ‘‘माफियाराज’’ गढ़ दिये है, जिनकी नींव भी बहुत मजबूत हो चली है जिनमें से निम्नलिखित कुछ प्रख्यात माफिया है जिनका कार्य न तो प्रदेश के हित में है और न ही जनता के हित में है:-

रेत उत्खनन माफिया ऽपत्थर उत्खनन माफिया (माइनिंग माफिया) मामा-टोल माफिया ट्रांसपोर्ट माफिया मिलावट माफिया वसूली माफिया – फिरौती माफिया भू – माफिया(महल सहित) हथियार माफिया नशा माफिया सट्टा, मटका, जुआँ माफिया शिक्षा संस्थान माफिया आदि ।

तिवारी ने कहा है कि आदरणीय  कमलनाथ जी ने “शुद्ध के लिये युद्ध” और “माफिया मुक्त मध्यप्रदेश” अभियान चलाकर जिस माफियाराज को समाप्त किया था, वह ‘‘शिवराज सरकार’’ में फिर लौट आया है। पाॅम आयल और केमिकल्स से बने दूध और उसी से बनते दुग्ध पदार्थों का कारोबार फिर उफान पर है, यही नहीं भिंड – शिवपुरी सहित कई जनपदों में स्थानीय व्यापारियों से हफ्ता वसूली/ रंगदारी बढ़ गयी है, हत्या, डकैती, छिनैती, लूट और अवैध हथियार रखना तथा गाँजे की खेती इस अंचल के कई जिलों के लिये आम बात हो गयी है। मुरैना जनपद में रेत की चोरी ऐसे युवा भी कर रहे है, जिन्हें रेत विक्रय का लाईसेंस नहीं मिल पा रहा है, राज्य के मा. गृहमंत्री जी के दतिया जिले में सट्टा, मटका, जुआ और नशाखोरी आम बात है, जो कई आत्म हत्यायें और परिवारों की तबाही का कारण बनी है।

तिवारी ने कहा है कि याद होगा कि मानव तस्करी, गैंग रेप, धोखाधड़ी, धमकाने और लूट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी जीतू सोनी जैसे माफिया को पहली बार काँग्रेस सरकार ने ही धर दबोचा था. अवैध निर्माणों की पुष्टि होने के बाद नगर निगम, पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से उसके 24 हजार वर्गफीट के प्लाॅट पर 7 हजार वर्गफीट में बने बंगला, होटल- माय होम, बेस्ट वेस्टर्न और ओ टू के अवैध हिस्सों को गिरा दिया था और उसे जेल भेजा था.
वर्ष 2019 में ग्वालियर में भी भू-माफिया के रूप में सामने आये नाम पर काँग्रेस सरकार ने कार्यवाही करते हुए सिटी-सेंटर में बनी विशालकाय ला-सफायर इमारत को गिरा दिया था. लेकिन काँग्रेस सरकार गिराये जाने के 3 वर्षों के भीतर वही इमारत फिर खड़ी हो चुकी है. इससे ज्यादा ज्वलंत प्रमाण नहीं है कि भा.ज.पा. सरकार स्वयं माफिया-संस्कृृति को पोषित करती है जबकि काँग्रेस सरकार माफियाओं की उगाही के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्यवाही करती है।

तिवारी ने कहा है कि शिक्षा संस्थान माफिया की गहरी जड़ों के उदाहरण व्यापाम, पटवारी भर्ती, नर्सिंग भर्र्ती घोटाले आदि के अलावा कुछ सैकड़ा शिक्षा संस्थान ऐसी भी हैं, जो सरकार से दषकों सालों से स्टाफ का वेतन और छात्रवृत्ति आदि लेते आये हैं लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व ही नहीं है – इसका ज्वलंत उदाहरण झुंडपुरा गाँव का एक काॅलेज है, जिसके बारे में ये ही मालूम नहीं है कि वह किस क्षेत्र में है ? लेकिन जीवाजी यूनिवर्सिटी की अधिकृृत वेबसाइट पर पिछले ग्यारह साल से है. ये कुछ उदाहरण केवल “टिप आफ़ द आइसबर्ग” है, जिन्हें खोदा जाये तो ऐसे घोटालों के पर्वत जमीन के अंदर मिलेंगे.

2. घटते रोजगार -भटकता युवा

भा.ज.पा. सरकार के इतने वर्षों में कोई भी नया डद्योग नही स्थापित किया गया है जिसके कारण नवयुवकों के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है.
मालनपुर (जिला भिंड) की दो तिहाई इंडस्ट्रीज बंद हो गयीं, जबकि कोई नया उद्योग नहीं लगा है. रोजगार नहीं है इसके कारण युवाओं का पलायन हो रहा है और नशे की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी हुई है। मुरैना का सहकारी शुगर कारखाना वर्ष 2011 से बंद पड़ा है, जिस पर 24 करोड़ रुपए का ऋण हो गया था जिसे शुरू करके रोजगार के अवसर प्रदान करने की कोशिश सरकार ने नहीं की.।

मुरैना जिले में ही बामोर की सीमेंट फैक्टरी भी इसी तरह बंद हुई जहां कोलारस और बधरेंटा से सीमेंट का पत्थर आया करता था. यहाँ भी लगभग 300 लोग काम करते थे, जो बेरोजगार हो गए हैं।
शिवपुरी भी एक उद्योग-धंधा विहीन जिला बन चुका है – कोई इंडस्ट्री नहीं है, युवा बेरोजगार है, शिवपुरी में पर्यटन-केंद्र बनने की हर पात्रता यानि ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर हरीतिमा से आच्छादित वन सम्पदा होने के बावजूद भी यह क्षेत्र केवल खनन माफिया का केंद्र बन कर रह गया है ।
दतिया को गुड़ उत्पादन का हब बनाने की बात भी की गयी थी. न ‘गुड़-हब’ बना और न ही कोई नयी इंडस्ट्री ही लगी.
मध्यप्रदेश से सबसे ज्यादा युवा सेनाओं में जाते थे, लेकिन अग्निपथ स्कीम से इन युवाओं के सपने भी टूट गये हैं।
भाजपा सरकार के संवदेनहीन मंत्री युवाओं और किसानों के खिलाफ अपमानजनक और अमर्यादित बयान देते रहे – जैसे  गोपाल भार्गव जी ने कहा कि किसानों की आत्महत्या का कारण उनका अमर न होना है. एक और विधायक  रामेश्वर शर्मा जी ने कहा था कि सब्सिडी चाटने वाले किसान आत्महत्या करते है.

3. मध्य प्रदेश में कानून और न्याय व्यवस्था तार तार

तिवारी ने कहा है कि एक तरफ मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड बेरोजगारों की संख्या 41लाख 60 हजार 379 हो चुकी है. आषा की कोई किरण न दिखने के कारण युवा वर्ग या तो आत्महत्या कर रहा है, या नौकरियों के लिये दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं या नशे की चपेट में आने पर विवश है. ये भी पब्लिश्ड हो चुका है कि वर्ष 2021 के छब्त्ठ के डेटा के अनुसार 14,965 लोगों ने मध्यप्रदेश में आत्महत्या की, लेकिन भा.ज.पा. सरकार के मंत्री कैट वाॅक करते रहे और वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ती रही । मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों जैसे मैहर, उज्जैन, ओंकारेश्वर से आईं बच्चियों के साथ बलात्कार की खबरों ने पूरे देश को हिला दिया था. कानून व्यवस्था की इस लचर हालत की जिम्मेदार भाजपा सरकार और खास तौर पर गृहमंत्री  नरोत्तम मिश्रा जी का विफल और निष्प्रभावी प्रशासन इसके लिये जिम्मेदार है.

तिवारी ने कहा है कि केन्द्रीय गृृह मन्त्री  अमित शाह जी के मंत्रालय ने लिखित में छब्त्ठ के वर्ष 2021 के डेटा में दिया है कि मध्यप्रदेश दलितों पर अत्याचारों में नम्बर वन है। वर्ष 2018 में पुलिस भर्ती के समय एस.सी. एस.टी. के उम्मीदवारों के सीने पर भाजपा की सरकार ने एस.सी. एस.टी. लिख कर उनका अपमानित किया था और बैरसिया में भाजपा नेता  तीरन सिंह ने  किशोरी लाल जाटव नाम के किसान को उसकी पत्नी के सामने ही पेट्रोल डालकर कर जिंदा जला दिया था।

तिवारी ने कहा है कि ग्वालियर- चम्बल अंचल में इसी वर्ष रिपोर्ट हुए चर्चित अपराधों की की तरफ ध्यान आकृृष्ट करते हुये कहा है किः-
ऽ जनवरी 2023 में आठ हथियारबंद लोगों ने सात चरवाहों का श्योपुर में अपहरण कर लिया था और प्रत्येक को मुक्त करने के लिए चार लाख रुपये की माँग की थी.

मार्च 2023 में श्योपुर में ही विजयपुर मुख्य बाजार में बुलंद हौसले के रेत माफियाओं की ट्रैक्टर-ट्राॅली को पकडने के लिए उप जिलाधिकारी ने ट्रैक्टर का पीछा किया और आगे से गाड़ी लगावाकर रोका और एक पुलिसकर्मी चलते हुये ट्रैक्टर पर चढ़ा लेकिन रेत माफिया के लोगों ने ट्रैक्टर-ट्राॅली को नही रोका. उस पुलिसकर्मी ने चलते ट्रैक्टर से कूदकर अपनी जान बचाई और एसडीएम को बिना कार्यवाई के खाली हाथ लौटना पड़ा, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. यह राजनैतिक सत्ता संरक्षित दबंगई का प्रमाण है तीन महीने पहले जुलाई 2023 में मुरैना में लाठी, फरसे और गोलियां चली, जिसमें एक युवक की मौत हो गयी और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

सितम्बर 2023 में राज्य के गृहमंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्रा जी के दतिया जिले में जानवर चराने पर हुए खूनी संघर्ष में गोलीबारी हुई, 5 लोगों की मौत हो गयी और 5 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे. कमीशन और भ्रष्टाचार की इस व्यवस्था से इस क्षेत्र का आम नागरिक दहशत में हैं. पैसे दो और काम लो की भ्रष्ट व्यवस्था ने दतिया में इन 5 लोगों की बलि ले ली.
पिछले ही महीने अक्टूबर में भिंड जिले में लहार रोड से परेड चैराहे तक पुलिस ने कानून और व्यवस्था की बदतर स्थिति के कारण फ्लेग मार्च निकाला था जो जाहिर करता है कि कैसे जिले के हालात प्रशासन के काबू नही आ रहे है!

तिवारी ने मध्य प्रदेश के कुछ अन्य जनपदों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुये कहा है कि:-
ऽ मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के रिकाॅर्ड-तोड़ भ्रष्टाचारों से आम आदमी हैरान और परेशान है. भाजपा सरकार में थाना, तहसील अस्पताल, गल्ला बांटने की सोसाइटी मे भ्रष्टाचार अपने चरम पर व्याप्त है, जिसके कारण आम आदमी की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. तहसीलों और थानों में बिना पैसे दिये कोई काम नही होता. निवाड़ी विधानसभा के एक गांव मकर के एक परिवार में उसके पिताजी की मृृत्यु हुए 2 साल हो गए हैं, लेकिन जमीन परिवार के नाम करने के लिये पटवारी ₹10000 (दस हजार) मांग रहा है और पैसे न दे पाने के कारण जमीन परिवार के नाम नही हो रही है. यानी विरासत की जमीन के लिये भी उत्तराधिकारियों से पैसे माँगे जा रहे हैं.

ऽदतिया के भांडेर तहसील के गाँवों में एक ही जमीन को पटवारी तीन-तीन लोगों के नाम दर्ज कर दे रहा है और जो सबसे ज्यादा पैसा दे रहा है उसी के नाम दर्ज हो जा रहे है. टीकमगढ़ के मोहनगढ़ तहसील के केशवपुर गांव में बालू निकालने का काम करने वालों के ट्रैक्टर घर से पुलिस वाले जबरदस्ती उठाकर बंद करते हैं और मन माफिक रकम मांगते हैं. स्वयं भी मांगते हैं और भाजपा नेताओं की मध्यस्थता से भी रकम माँगी जाती है.

ऽ मध्य प्रदेश के चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार है पिछले 20 साल की भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार इस कदर फैलाया है कि गरीब और आम आदमी की हालत बहुत खराब है जिसका एक उदाहरण यह है कि आदिवासियों के पास आयुष्मान कार्ड नही है, लेकिन ट्रैक्टर और हवेली जैसी सम्पत्ति वालों के पास आयुष्मान कार्ड है. भारतीय जनतापार्टी से जुड़े हर बड़े आदमी के पास आयुष्मान कार्ड है. यही स्थिति अंत्योदय कार्ड की भी है
ऽ छतरपुर जिले में वन विभाग की जमीन पर ही दबंगों ने कब्जा कर लिया, जो वन विभाग की स्वयं की रिपोर्ट में दर्ज है.

ऽसरकारी अस्पतालों में दवाइंयांॅ उपलब्ध नही है. मरीजों को समुचित इलाज नही मिल पा रहा है. गरीब आदमियों को अस्पतालें में भर्र्ती नही किया जा रहा है. भिंड जिले की बेहाल स्वास्थ्य सुविधाओं और डाक्टरों की कमी के बारे में सभी परिचित है.
ऽमध्यप्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी नेताओं के सामने कमजोर पड़ रही है और जो लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उनके ऊपर फर्जी मुकदमे किये जा रहे हैं.

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