राम और ऐतिहासिक धरोहरें एक दूसरे के पूरक हैं : डॉ. उमाशंकर पचौरी

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ग्वालियर
राम और ऐतिहासिक धरोहरें एक दूसरे के पूरक हैं । भारत ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के प्रतिमान भारतीय ऐतिहासिक धरोहर के रूप में राम के संदर्भ में सम्पूर्ण विश्व को दिया । शिक्षा में रामत्व के अभाव से ही भारत में सामाजिक व ऐतिहासिक विकृति आई है । जब गुरू अपने शिष्य के आंतरिक अंधकार को दूर करने के बाद उसे सदमार्ग पर ले आए , यही शिक्षा में रामत्व के भाव की प्रामाणिकता है । ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करके अगली पीढ़ी को देना ही धरोहर दिवस की सार्थकता का परिचायक है ।

अपने मन के प्रतिकूल कही गई बातों को सुनने के बाद भी सामान्य व्यवहार रखना ही शिक्षा में रामत्व के भाव को जीना है । यह बात भारतीय शिक्षण मण्डल के 55 वें स्थापना दिवस एवं विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर माधव महाविद्यालय में आयोजित इतिहास भूषण सम्मान समारोह के साझा कार्यक्रम में “शिक्षा में रामत्व एवं अमृतकाल में विकसित भारत” विषय पर मुख्य वक्ता की आसंदी से बोलते हुए अखिल भारतीय शिक्षण मण्डल के उपाध्यक्ष डॉ. उमाशंकर पचौरी ने कही । कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के शासीनिकाय अध्यक्ष डॉ. सुधीर चतुर्वेदी ने की । विशिष्ठ अतिथि पी.एस.यू.महाविद्यालय मुरैना के प्राचार्य डॉ. जितेन्द्र शर्मा , अखिल भारतीय शिक्षण मण्डल के संयुक्त महामंत्री पंकज नाफड़े व शा.(स्वशासी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय दतिया के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश यादव थे ।

कार्यक्रम को अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्वलित कर
किया गया । अतिथि परिचय इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मनोज अवस्थी ने दिया । विशिष्ठ अतिथि पंकज नाफड़े ने अपने उद्बोधन में कहा कि अ. भा.शिक्षण मण्डल शिक्षा में सुधार की दृष्टि से लगातार प्रयास कर रहा है । भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में मूल्य परक शिक्षा के माध्यम से भारतीय जनमानस के चिंतन में भारतीयता के भाव से अध्ययन अध्यापन की व्यवस्था कराना ही भारतीय शिक्षण मण्डल का उद्देश्य है ।
अपने अध्यक्षीय उदबोधन में डॉ. सुधीर चतुर्वेदी ने कहा कि राम और दीपक का गुण एक समान है जिन्होंने हमेशा देना ही सीखा है इसके बदले कुछ चाहा नहीं । शिक्षा में रामत्व के भाव भी कुछ ऐसे ही हैं । उन्होंने विश्व विरासत दिवस पर सांस्कृतिक मूल्यों की उपादेयता पर भी प्रकाश डाला ।

इस अवसर पर इतिहास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के उपलक्ष्य में डॉ. उमाशंकर पचौरी , डॉ. जितेन्द्र शर्मा और डॉ. योगेश यादव को प्राचार्य डॉ. शिवकुमार शर्मा एवं शासीनिकायअध्यक्ष डॉ. सुधीर चतुर्वेदी ने शॉल-फल एवं प्रशस्ति पत्र देकर इतिहास भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज अवस्थी ने एवं आभार प्रदर्शन प्राचार्य डॉ. शिवकुमार शर्मा ने किया ।

इस अवसर पर मोहम्मद इज़राइल खान , प्रो. मनीष खेमरिया , डॉ. बृजेश शर्मा , नवनीत पचौरी , टोटन माहिती , डॉ. जगमोहन द्विवेदी , शैलेन्द्र सिंह , नितिन विटवेकर , धर्म सिंह , डॉ. नीलेन्द्र सिंह तोमर , डॉ. संतोष शर्मा , डॉ. संजय कुमार पाण्डेय , डॉ. निवेदिता पांचाल , डॉ. विकास शुक्ल , डॉ. राजेश मिश्रा , डॉ. सरिता दीक्षित , डॉ. मंदाकिनी शर्मा , डॉ. दीप्ति नारंग , डॉ. राकेश करहेरिया , डॉ. दीपक शिन्दे , डॉ. दिनेश कुशवाह , डॉ. योजना तिवारी , डॉ. रूपाली गोखले एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्रा उपस्थित रहे ।

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