गोला का मंदिर क्षेत्र की नारायण विहार दीनारपुर में 20 बीघा जमीन पर बसी अवैध कॉलोनी, 70 मकान गिराए
विशेष संवाददाता, ग्वालियर।
जिला प्रशासन के अगुवाई में शनिवार को छुट्टी वाले दिन गोला का मंदिर थाना क्षेत्र में दीनारपुर कृषि मंडी के पास 20 बीघा सरकारी जमीन पर खड़े किये गए आशियानों पर जेसीबी के पंजों ने कहर ढाया। सुबह से चली जेसीबी ने 12 बजे तक 70 आशियानों को जमींदोज कर दिया। चिलचिलाती धूप में बच्चे, महिला रोते रहे, आंसू और पसीने से शरीर तरबतर होता रहा। अधिकारियों से गुहार लगाते रहे लेकिन वही होना था जो सरकारी जमीनों से गरीबों के आशियानें ढहाने पर होता है। नगर निगम दी गई पानी, सड़क, बिजली विभाग के खंबे और बिजली कनेक्शन से आबाद इस अवैध कॉलोनी में यह कार्रवाई तो हुई लेकिन कई गंभीर सवाल फिर खड़े हो गये, जिनके जबाब न पहले किसी के पास थे, न आज हैं। एक सवाल यह भी कि भू-माफिया कौन है, जमीन बेचने वाले, जिम्मेदार अधिकारी या सफेदपोश ?
पांच साल से चल रहा था खेल
करीब दो सौ करोड़ कीमत की सरकारी जमीन पर भू-माफिया लगातार प्लॉट बेचते चले आ रहे थे। ज्यादातर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग ने उनके सस्ते में प्लॉट लिये। किसी ने पक्की दीवार पर टीनशेड डाला, किसी ने बाउण्ड्रीवॉल की तो किसी ने पक्का मकान बनाया। इसमें से करीब 70 मकान ढहा दिये। सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक यह कार्रवाई चली। इसमें एसडीएम अशोक चौहान, निगम के मदाखलत के नोडल अधिकारी अतिबल सिंह यादव, एसीपी प्रदीप सिंह जादौन, भवन अधिकारी पवन शर्मा व पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई।
इन सवालों का भी देना चाहिए जबाव
-अधिकारियों के मानें तो करीब 20 बीघा जमीन सरकारी है जिसकी कीमत करीब दो सौ करोड़ रुपए हैं। लगभग आधे से ज्यादा जमीन माफियाओं के बेच दी। लगातार 5-6 साल से यह खेल चलता रहा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम, पुलिस के अधिकारियों की आंख क्यों नहीं खुली।
-दो साल पहले भी प्रशासन ने कार्रवाई की थी, उस समय भी भेदभाव बरता गया और कई लोगों के मकान छोड़ दिये गए थे।
-माफियाओं के खिलाफ उस समय भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, उन्हें जेल की सलाखों तक भेजने में अधिकारियों ने कोई दिलचस्पी नहीं ली।
-उस समय खाली कराई गई जमीन पर बाउण्ड्रीवॉल की गई न तार फेंसिंग। इस कारण भू-माफियाओं के हौंसले बुलंद होते गए।
-क्षेत्र के पार्षद, विधायक, अन्य नेता, प्रशासन, नगर निगम, पुलिस के अधिकारी मौन होकर आंखों के सामने भू-माफियाओं की गतिविधियों को देखते रहे।
-किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने जेवर बेचकर सस्ते में जमीन खरीदी, छत का इंतजाम किया, फिर गरीबों के आवास की योजना आखिर किस के लिए है।
-आज की कार्रवाई के बाद भी प्रशासन यह पता नहीं लगा सका कि 20 बीघा जमीन को किस माफिया ने बेचा है।
इनका कहना है
करीब 20 बीघा जमीन सरकारी है। इस जमीन पर अवैध रूप से बने 70 मकान, बाउण्ड्रीवॉल को तोड़ा है। जमीन किसने बेची, यह पता लगाया जा रहा है, उसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। पहले भी इस जमीन से अतिक्रमण हटाया था और एफआईआर कराई थी।
अशोक चौहान, एसडीएम












