JU की लॉ की छात्रा ने “मानव तस्करी व अंग तस्करी” पर किया रिसर्च

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ग्वालियर – जीवाजी विश्वविद्यालय के विधि संस्थान की शोध छात्रा पूजा खरे ने समाज में व्याप्त अपराध “मानव तस्करी व अंग तस्करी”पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि इस शोध कार्य को पूर्ण करने में उन्हे तीन वर्ष लगे। यह शोध समाज में व्याप्त अपराध “मानव तस्करी व अंग तस्करी” से संबंधित है, जिसमें उन्होंने समस्या के बढ़ने के कारणों तथा उसके निवारण से संबंधित विधियों को मुख्य रूप से अपने शोध में बताया है। मानव अंग तस्करी होने के पीछे अंगो की अधिक मांग व अंग दान करने वालों की कम संख्या है। उन्होंने बताया कि यदि मृत व्यक्ति के शरीर का दाह संस्कार न करके उसके आवश्यक अंगों को दान कर दिया जाना चाहिए।तस्करी में लिप्त लोगों पर कार्यवाही के लिए कठोर कानून बने जिसका जमीनी स्तर पर इंप्लीमेंटेशन किया जाए।अंग दान की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए जिससे लोगो को परेशानी का सामना न करना पड़े। मानव तस्करी व अंग तस्करी के लिए एकल कानून व कठोर कानून बने।न्यायिक प्रक्रिया सरल हो जिससे पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को न्याय प्राप्त करने में देरी न हो।ऐसे ही अन्य सुझाव भी उन्होंने अपने शोध में दिए।इसमें उनकी हर संभव मदद उनके मित्र डॉ.प्रदीप सिंह ने की।

मानव तस्करी का कारण:-मानव तस्करी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अशिक्षा ही मानव तस्करी का मुख्य कारण है। गरीबी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग दिहाड़ी मजदूरी व रोजगार के लिए पलायन कर दलालों की चंगुल में फंसकर मानव तस्कर का शिकार हो जाते हैं।

रोकने के उपाय:- मानव तस्करी के बारे में जागरूकता फैलाकर तस्करी रोकने में मदद करने के लिए स्थानीय धार्मिक समुदाय के साथ काम करें।लोगों को नौकरी,इंटर्नशिप,कौशल प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करें।अति संवेदनशील समुदायों के लिए जीविकोपार्जन और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाएं,तस्करी को रोकने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन को आसान बनाएं,तस्करी के निवारण को सुनिश्चित करने के लिए कानून और व्यवस्था संबंधी फ्रेमवर्क बनाएं।

जेयू के प्राध्यापक डॉ.रामशंकर सिंह का कहना है कि बिना लीगल रिसर्च के कोई भी कानून नहीं बन सकता।किसी भी प्रकार का कानून बनने से पहले लीगल रिसर्च करना महत्वपूर्ण ही नहीं अनिवार्य भी हैं।लीगल रिसर्च प्रत्येक कानून के लिए एक मूल रूप का काम करता है।

शोध छात्रा पूजा खरे ने बताया कि मानव तस्करी व अंग तस्करी से संबंधित जो भी कानून हैं उन्हें एक संहिता बद्ध किया जाना चाहिए व दंड के प्रावधानों को कठोर किया जाना चाहिए।अंग दान के लिए जो प्रक्रिया है उसे सरल बनाया जाना चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से अंगदान कर सके और जरूरत मंद उन्हें प्राप्त कर सके क्योंकि मेडिकल ट्रीटमेंट प्राप्त करना अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्ति का अधिकार। अतः कानूनों में व्याप्त कमियों को दूर किया जाना चाहिए जिससे इस समस्या का निवारण हो तथा अपराधों में भी कमी आए।

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