मामला आदिम जाति कल्याण विभाग में हुए करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का
हरीश चंद्रा, ग्वालियर।
आदिम जाति कल्याण विभाग में हुए करोड़ों रुपए घोटाले के आरोपी व्याख्याता पुरुषोत्तम शर्मा ने शासन को गलत जानकारी देकर अनुसूचित जाति एवं जनजातीय कार्य विभाग ग्वालियर संभाग उपायुक्त का पद हथिया लिया। पुरुषोत्तम शर्मा ने यह तथ्य छिपा लिया था कि उनके खिलाफ इस घोटाले में आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में अपराध क्रमांक 23/2013 दर्ज है। आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सिंह कुशवाह ने जब इसकी शिकायत संभागीय आयुक्त सुदाम खाड़े से की। इस शिकायत की जांच के लिए संयुक्त आयुक्त (विकास) ग्वालियर संभाग सीएल डोडियार ने आरोपी पुरुषोत्तम शर्मा को ही जांच की जिम्मेदारी दे दी यानी आरोपी से ही उस पर लगे आरोपों की जांच करा ली। आखिर, जब आरोपी पुरुषोत्तम शर्मा से ही जांच कराई तो पुरुषोत्तम शर्मा ने जांच में न केवल तथ्य छिपा लिए बल्कि शिकायत को ही फर्जी करार दिया। पुरुषोत्तम शर्मा ने संभागायुक्त को भेजी जांच रिपोर्ट में यह तथ्य छिपा लिया की ईओडब्ल्यू में दर्ज अपराध क्रमांक 23/2013 दर्ज है और वे उसमें आरोपी हैं। बल्कि जांच रिपोर्ट में यह लिख दिया कि तत्कालीन संभागीय उपायुक्त केडी त्रिपाठी के विरुद्ध अनिमितता संबंधी शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज हुआ है। पुरुषोत्तम शर्मा ने यह भी लिख दिया कि अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के उद्देश्य से गुमनाम और फर्जी तरीके से शिकायत कराई जा रही हैं। आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सिंह कुशवाह ने फिर एक शिकायत संभागायुक्त को भेजी जिसमें सबूतों के साथ बताया गया कि इस घोटाले में पुरुषोत्तम शर्मा भी आरोपी हैं और उन्होंने यह तथ्य छिपाकर संभागीय उपायुक्त का पद हथियाया है। अब संभागायुक्त ने इसकी जांच कलेक्टर से कराने के निर्देश सीएल डोडियार को दिये हैं। श्री डोडियार ने कलेक्टर को इस मामले की जांच कर 10 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय है कि संभागीय उपायुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग ग्वालियर संभाग में 2008-09, 2009-10 में छात्रवृत्ति फार्म छपाई सहित अन्य आर्थिक घोटाला हुआ था। शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 23/2013 दर्ज किया था जिसमें आदिम जाति कल्याण विभाग के तत्कालीन संभागीय उपायुक्त केडी त्रिपाठी, व्याख्याता(वर्तमान में प्रभारी संभागीय उपायुक्त) पुरुषोत्तम शर्मा सहित अन्य आरोपी हैं। शासन ने इस मामले में ईओडब्ल्यू को अदालत में चालान प्रस्तुत करने की अनुमति भी दे दी है।












