ग्वालियर -आप कब, कहां, किस से प्रेरित हो जाएं और आपको अपने जीवन का मकसद मिल जाए, यह कोई नहीं जानता है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ग्वालियर निवासी राज चड्ढा जो ग्वालियर के प्रतिष्ठित राजनेता रहे, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर के जिला अध्यक्ष, प्रदेश मंत्री, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष सहित विभिन्न प्रमुख पदों पर सुशोभित रहते हुए सत्य निष्ठा व कर्तव्य परायणता के साथ कार्य किया। लेकिन 66 वर्ष की उम्र में राज चड्ढा को पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद मेनका गांधी जो भारतीय राजनीति के साथ पशु अधिकार कार्यकर्ता और पर्यावरणविद हैं के लेख ने जीवन का असली मकसद दे दिया। जो पक्षी संरक्षण विषय पर केंद्रित था। जिसमें लिखा था

“पक्षियों के लिए दाना से अधिक भीषण गर्मी में पानी की उपलब्धता कराने की जरूरत है। क्योंकि पक्षियों को दाना तो किसी तरह फल, फूल, कीड़े, मकोड़ों के रूप में भी प्राप्त हो जाता है। लेकिन भीषण गर्मी में पानी की उपलब्धता न होने से वे तेजी से जान गंवा रहे हैं। यह पक्षी ही है जिन्होंने दूर-दराज के जंगलों और हमारे आसपास पेड़-पौधे लगाए हैं। जिनसे हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्राप्त होती है। आज पक्षियों के जीवन पर संकट के बादल गहरा रहे हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से भविष्य में मनुष्य जीवन पर भी खतरे की घंटी बज रही है। इसलिए हमें पक्षियों को जल उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करना चाहिए। जिससे प्रत्यक्ष रूप से पक्षियों का जीवन और अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य का जीवन बच सके।”
और यही लेख राज चड्ढा को इतना प्रेरित कर गया कि उन्होंने राजनीति से संन्यास लेकर “दाना पानी 4 बर्ड्स” अभियान को अपने जीवन का मकसद बना लिया। अभियान की शुरुआत उन्होंने अपनी धर्मपत्नी नीति चड्ढा के साथ 22 फरवरी 2012 को की और फिर लोग जुड़ते चले गए और कारवां बनता गया आज अभियान को 12 वर्ष पूर्ण हो गए हैं और अभियान निरंतर जारी है। इन 12 सालों में 1500 से अधिक लोग “दाना पानी फॉर बर्ड्स” समूह से जुड़ चुके हैं, जो समय-समय पर अभियान के कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होते रहे हैं। दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह इन 12 सालों में ग्वालियर में 2 लाख से अधिक सकोरे (जल-पात्र) शहर के विभिन्न पार्को, धार्मिक आयोजनों, सांस्कृतिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों और सब ऐसी जगह जहां लोग एकत्रित होते हैं निःशुल्क बांट चुके हैं। प्रत्येक रविवार को समूह के सदस्य एकत्रित होकर सकोरे (जल-पात्र) निशुल्क भेंट इस आग्रह के साथ करते हैं कि वह इस जल-पात्र को अपने घर आंगन या ऐसी जगह जहां पक्षियों की पहुंच हो जल से रोज भरकर रखें। जिससे भीषण गर्मी में निशक्त पक्षियों के प्राण बच सकें।
समूह के संयोजक राज चड्ढा बताते हैं कि सकोरे वितरण के साथ-साथ समूह ऐसी जगहों जहां पर जहां बड़ी संख्या में लोग प्रातः सैर करने आते हैं। उन स्थानों पर लगे पेड़ों पर सकोरे लटकाते हैं और लोगों से संकल्प कराते हैं कि उन्हें वे रोजाना पानी से भरते रहें। वह बताते है दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह से प्रेरित होकर देश के बहुत से शहरों में सकोरे वितरण के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। अब तो अमेरिका के वॉशिंगटन में शशि आनंद, दुबई में विनीत पंडित, रूस के टवेर नगर में अनुराधा गोयल (सिंघल) के नेतृत्व में अभियान चलाया जा रहा है। दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह पक्षियों की सेवा प्रभु की सेवा मानकर कर रहा है। उद्देश्य निशक्त पक्षियों को बचा कर प्रकृति संरक्षण कर प्रत्यक्ष रूप से पक्षियों और अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के भविष्य को सुरक्षित करने का है। जीवन में विभिन्न पदों पर रहकर सेवा कार्य करने का मौका मिला लेकिन जो आनंद, सुकून निशक्त पक्षियों की सेवा करने में मिल रहा है। उससे मेरा जीवन धन्य हो गया है। मुझ पर ईश्वर की विशेष कृपा रही कि अब मुझे 66 वर्ष की उम्र में छल-कपट की राजनीति से निकलकर जीवन का असल उद्देश मिला। जिससे आज 78 वर्ष की उम्र में मेरा जीवन सार्थक हो गया।












