ग्वालियर – सागरताल जगनापुरा के पास स्थित नगर निगम की लगभग 12 करोड़ राजस्व की भूमि को लेकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय की आदेश की पुष्टि करते हुए निगम के पक्ष में फैसला दिया गया था। रफी खान द्वारा उक्त उच्च न्यायालय के आदेश को माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया है। उक्त संपत्ति निगम की पूर्ण स्वत्व, स्वामित्व एवं आधिपत्य की माननीय न्यायालय से घोषित हुई है।
विधि अधिकारी श्री अनूप लिटोरिया ने जानकारी देेते हुए बताया कि वादी रफीक खां द्वारा ग्राम जगनापुरा सागरताल स्थित सर्वे क्र. 443,449,450,452 कुल एरिया 06 बीघा 15 बिस्वा के स्वत्व स्वामित्व के संबंध में एक सिविल सूट 1570/2004 रफीक खां विरूद्ध नगर निगम ग्वालियर प्रस्तुत किया। जिसे माननीय न्यायाधीश वर्ग-02 द्वारा दिनांक 11/08/2005 को खारिज किया गया। उपरोक्त सिविल सूट के आदेश दिनांक 11/08/2005 के विरूद्ध रफीक खां द्वारा माननीय अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष प्रथम अपील 45ए/2005 प्रस्तुत की जिसे माननीय ए.डी.जे. न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 05/01/2006 द्वारा निरस्त किया गया तथा यह पाया कि वादी न तो वादग्रस्त भूमि का कब्जेदार है और न ही स्वत्वधारी है।
वादी रफीक खां द्वारा उक्त अपीलीय आदेश दिनांक 05/01/2006 के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के समक्ष सेकेण्ड अपील 115/2006 प्रस्तुत की गई है जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक द्वारा खारिज किया गया था उक्त उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ता रफीक खान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी प्रस्तुत की गई थी जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज किया गया।
उपरोक्त प्रकरण में निगम की ओर से माननीय न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा गया जिससे बहुमूल्य संपत्ति माननीय न्यायालय से निगम के स्वत्व, स्वामित्व एवं अधिपत्य की घोषित हुई है । शीघ्र ही उक्त निगम आधिपत्य की संपत्ति पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एक बड़ी परियोजना विकसित की जावेगी












