कटघरे में सरकारी वकील भाग-2, सरकार को अंधेरे में रख 50 करोड़ कीमत की सरकारी जमीन ठिकाने लगा दी

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ग्वालियर शहर लश्कर के दौलतगंज में पार्क की जमीन का मामला

हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।

सरकारी जमीनों की रक्षा के लिए मप्र सरकार ने पूरे भरोसे से विजय कुमार शर्मा को शासकीय अधिवक्ता तो बना दिया लेकिन उनकी लापरवाही और माफियाओं से मिलीभगत का खामियाजा अब सरकार को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा एक और मामला सामने आया है जिसमें शहर लश्कर के दौलतगंज की करीब 50 करोड़ कीमत की जमीन निजी हाथों में चली गई।

निर्धारित समय अवधि बीतने के बाद सरकार ने इस मामले में अब हाई कोर्ट में अपील की है। आरटीआई एक्टिविस्ट संकेत साहू ने इस मामले में विजय कुमार शर्मा पर माफियाओं से साठगांठ कर सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगाते हुए मुख्यमंत्री को शिकायत भेजते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच कर शासकीय अभिभाषक विजय कुमार शर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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मुख्यमंत्री को यह भेजी है शिकायत

-ग्वालियर शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़ा के पास दौलतगंज में स्थित अग्रसेन पार्क से लगी शासकीय भूमि है, जिसके जिला एवं तहसील ग्वालियर के आरआई सर्कल लश्कर का ग्राम शहर लश्कर का सर्वे नंबर 795 हैं। यह भूमि मिसिल बंदोबस्त संवत 1997  (वर्ष 1940) में खसरों में भूमि की स्थिति शासकीय दर्ज होकर कॉलम नंबर 29 में पार्क दौलतगंज लिखा है।

-प्रशासन ने अतिक्रमणकारी राजेंद्र शर्मा, संजय सिंघल, मोहनलाल अग्रवाल, भगवत सहाय अग्रवाल, श्याम लाल अग्रवाल, रघुनन्दन अग्रवाल इन सभी को अलग अलग आदेशों के द्वारा 08.06.2011 को नोटिस जारी करते हुए 09.06.2011 तक अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये थे। अतिक्रमणकारियों को 10.06.2011 को तहसीलदार न्यायालय में उपस्थित होकर रिपोर्ट कर स्वामित्व के सम्बन्ध में दस्तावेजों को प्रस्तुत करने हेतु कहा गया था। अतिक्रमणकारियों के द्वारा तहसीलदार के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत किये गये, जिस पर तहसीलदार ने समस्त दस्तावेजों को बारीकी से परीक्षण किया और भूमि को सरकारी मानते हुए 11.06.2011 को अतिक्रमण हटाने व निर्माण कार्य तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया। इस पर अतिक्रमणकारियों के द्वारा 13.06.2011 को न्यायालय में शासकीय अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा के माध्यम से वाद / प्रकरण प्रस्तुत किये गए, जिसमें शासन की ओर से तत्कालीन शासकीय अधिवक्तागण उपस्थित होते रहे एवं वादी / अतिक्रमणकारियों की ओर से शासकीय अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा पैरवी करते रहे l

-10.10.2019 को विजय कुमार शर्मा शासकीय अधिवक्ता नियुक्त हुए जबकि वे इस प्रकरण में अतिक्रमणकारियों के अधिवक्ता थे। वे वादीगणों की ओर से पैरवी करते रहे जबकि शासकीय अधिवक्ता होने के दायित्व एवं कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उन्हें शासन के विरुद्ध पैरवी नहीं करना चाहिये थी।

– विजय कुमार शर्मा ने अवैध लाभ प्राप्त कर अतिक्रमणकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भूमि को खुर्दबुर्द किये जाने का षडयंत्र किया। अतिक्रमणकारीयों द्वारा स्वत्व, स्वामित्व के सम्बन्ध में जो साक्ष्य प्रस्तुत की गई जिसके विरोध में विजय कुमार शर्मा ने वादीगणों के तथ्यों का न खंडन किया और न ही शासन की ओर से मजबूत पक्ष रखने दिया। विजय कुमार शर्मा द्वारा जानबूझकर शासन का पक्ष रखे जाने हेतु किसी भी अन्य एजीपी को नियुक्त नहीं किया।

-विजय कुमार शर्मा की नियुक्ति शासकीय अधिवक्ता के रूप में होने के पश्चात भी 31.10.2019 को न्यायालय में अतिक्रमणकारीयों एवं अपने पक्षकारों की ओर से शासन के विरुद्ध पैरवी की गई जो कि स्पष्ट: व्यवसायिक कदाचरण की श्रेणी में आता हैं l

-31 अक्टूबर 2019 के बाद विजय कुमार शर्मा के शासन की ओर से उपस्थित नहीं होने के कारण विचारण न्यायालय द्वारा मप्र शासन को एकपक्षीय कर दिया गया। किसी भी नियत तारीखों पर कोई शासकीय अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए, जबकि उक्त प्रकरण शासन की बेशकीमती भूमि के सम्बन्ध में थे। यह महत्वपूर्ण जानकारी विजय कुमार शर्मा के संज्ञान में थी।

-विचारण न्यायालय द्वारा 23 फरवरी 2022 जारी आदेश में अतिक्रमणकारियों का आधिपत्य नहीं माना l

-अतिक्रमणकारियों द्वारा अदालत के उक्त आदेश के विरुद्ध जिला एवं सत्र न्यायाधीश ग्वालियर की अदालत में मार्च 2022 को अपील प्रस्तुत की गई, जिस पर न्यायालय द्वारा शासन को अपना पक्ष रखने हेतु सूचना पत्र जारी किया गया।

-अगस्त 2022 को तत्कालीन तहसीलदार लश्कर क्षेत्र द्वारा शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता को वकालतनामा दे दिया गया। बाद में प्रकरण की ओआईसी शुभ्रता त्रिपाठी द्वारा प्रकरण के सम्बन्ध में कोई भी जानकारी नहीं ली गई और न ही शासकीय अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा द्वारा शासन की ओर से दस्तावेज, साक्ष्य, लिखित तर्क आदि दिए गए l

-उक्त प्रकरण में अतिक्रमणकारी, विजय कुमार शर्मा के क्लाइंट / पक्षकार / पडोसी / रिश्तेदार थे। सरकार की ओर से मजबूत पक्ष न रखे जाने पर जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा 14 अगस्त 2023 को अपील स्वीकार करते हुए अतिक्रमणकारियों को भूमि का आधिपत्यधारी एवं भू-स्वामी घोषित कर दिया गया।

-इस मामले में शासन को निर्धारित समयाविधि में हाई कोर्ट में अपील करना चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। शासन ने अब अपील प्रस्तुत की है लेकिन इसमें फिलहाल स्टे नहीं मिला है। हालांकि हाई कोर्ट ने अपील की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय का रिकॉर्ड तलब कर लिया है।

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