अतिक्रमण बताकर वृद्धा का तोड़ा मकान, मानव अधिकार आयोग ने थमाया नोटिस

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ग्वालियर –  शहर के लक्कड़खाना निवासी एक बजुर्ग महिला रामदुलारी कोटिया के निजी मकान को शासकीय जमीन पर अतिक्रमण बताकर नगर निगम के अधिकारियों ने तोड़ा था। जांच में वह जमीन शासकीय नही निकली। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कोर्ट ने जांच कार्यवाही को गलत माना है।

अपने निर्णय में एसडीएम कोर्ट आवास विहीन हो गई बुजुर्ग महिला को शासन की अफोंडेबल हाउसिंग स्कीम के तहत मकान बनवाने का आदेश दिया है। जिस बुजुर्ग महिला का मकान तोड़ा गया है उनका कहना है कि यह एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिये कार्यवाही की हुई थी, जबकि उसका मकान ही नक्शे के हिसाब से नहीं बन रहा और उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। नगर निगम ने लगभग पांच महीने पहले रामदुलारी कोटिया को नोटिस दिया।

नोटिस के बाद महिला ने अपना जबाव प्रस्तुत करते हुुये मकान की रजिस्ट्री, 1965 का नक्शा और पिछले 40 वर्षों से वहां पर रहने के सबूत नगर निगम अधिकारियों को दिये गये। इसके बावजूद भी नगर निगम के अधिकारियों ने पिछले तीन माह में दो नोटिस थमा दिये। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर एवं नगर निगम कमिश्नर, ग्वालियर से प्रकरण की जांच कराकर की गई कार्यवाही का एक माह में प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही ऐसी कार्यवाही में संलग्न रहे अधिकारियों की भी स्पष्ट जानकारी प्रतिवेदन के साथ प्रेषित करने के निर्देश् दिये हैं।

बड़ा अस्प्ताल – शौचालय का अभाव

ग्वालियर शहर का 1000 बिस्तर का अस्पताल मरीजों के लिये परेशानी का सवब बनता जा रहा है। बीते सोमवार को मरीज टाॅयलेट के लिये परेशान हो रहे थे। इसकी वजह यह थी कि सी-ब्लाॅक की तीसरी मंजिल पर संचालित मेडीसिन सर्जरी वार्ड सहित कई विभाग ऐसे थे जहां पर एक ही टाॅयलेट का उपयोग करना पड़ रहा है।

शहर के एक जनप्रतिनिधि द्वारा 15 दिन में अस्पताल की कमियों को दूर करने के निर्देश दिये थे, किंतु निर्देशों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। न तो टाॅयलेट ही साफ हो रहे हैं और न हीं दीवारों पर पड़ी दारारों को पूरी तरह से भरा गया है। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कमिश्नर, ग्वालियर से प्रकरण की जांच कराकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में आ रही समस्या का शीघ्र समाधान कर अस्पताल में आ रहे मरीजों की गरिमा एवं स्वास्थ्य सुविधा आदि को सुनिश्चित कराकर तीन सप्ताह में जबाव मांगा है।

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