ग्वालियर नगर निगम परिषद को ठेंगा दिखाकर 28 करोड़ के टेंडर पास कराने का षड़यंत्र

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पिछली बार भी होर्डिंग्स शाखा ने किया था खेला, बिल्लू बादशाह ने किया था भांडाफोड़, पूरी टीम पर गिरी थी गाज

हरीश चन्द्र, ग्वालियर।

ग्वालियर नगर निगम की होर्डिंग्स शाखा की नई टीम ने बड़ी चतुराई से करीब 28 करोड़ रुपए के गेंट्री के टेंडर चहेती फर्म को देने की तैयारी कर ली है। इस बार अधिकारियों ने ऐसी चतुराई से काम लिया है कि चहेती फर्मों को टेंडर भी मिल जाएं और निगम परिषद को भनक भी न लगे। यह चतुराई ऐसे दौर में की है जब कानून के रखवालों को होर्डिंग्स शाखा के समस्त मामले देखने की विशेष जिम्मेदारी है।

देखें कैसे कर रहे चतुराई

दो करोड़ रुपए तक के कार्यों की स्वीकृति के अधिकार आयुक्त को, 5 करोड़ तक के महापौर, 20 करोड़ तक के महापौर की अध्यक्षता वाली मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) और 20 करोड़ से ऊपर के कार्यों की स्वीकृति नगर निगम परिषद से होती है। लेकिन चतुर अधिकारियों ने करीब 28 करोड़ रुपए के गेंट्री के टेंडर को दो टुकड़ों में कर दिया। इससे एक टेंडर की राशि करीब 9 करोड़ रुपए और 10 साल तक के लिए करीब 14 करोड़ रुपए हो रही है। दूसरे जोन के टेंडर की भी लगभग यही स्थिति है। लेकिन चतुराई दिखाते हुए अधिकारियों ने दोनों ही टेंडर मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) से ही पास करा लिए इससे निगम गलियारे में यह चर्चा चल निकली है कि चहेती फर्म को टेंडर देने में एमआईसी की भी भूमिका है।

दो टुकड़ों में गेंट्री के टेंडर

शहर के प्रमुख मार्गों पर दिशा सूचक बोर्ड (गेन्ट्री) लगी हैं। नगर निगम की करीब 35 गेन्ट्री हैं। शहर की सुंदरता बनाए रखने रंग, रूप, साइज में एक समान गेन्ट्री पर विज्ञापन और दिशा प्रदर्शित करने के लिए निगम प्रशासन को एक टेंडर जारी करना था। लेकिन मामले को परिषद में पार्षदों से बचाने के लिए अधिकारियों ने इसे दो भागों (पैकेज) में बांट दिया। पैकेज जी-1 में 20 पुरानी और 7 नई गेन्ट्री का उल्लेख किया है। 10 साल के लिए फर्म को ठेका दिया जाएगा। इसकी ऑफसेट वैल्यू 85 लाख 75 हजार 530 रुपए रखी गई है। इसी तरह पैकेज जी-2 में 19 पुरानी और 8 नई गेन्ट्री का टेंडर निकाला है। इसकी ऑफसेट वैल्यू 9 करोड़ 13 लाख 22,460 रुपए रखी है।

दोनों की टेंडर 10-10 साल के लिए दिया जाना है। शर्त है कि हर साल 10 फीसदी राशि बढ़ाई जाएगी। इस तरह देखें तो दोनों टेंडरों की 10 साल की वैल्यू करीब 28 करोड़ रुपए हैं। फिर भी दोनों टेंडर एमआईसी ने मंजूर कर दिये और निगम परिषद को ठेंगा दिखा दिया।

अब किसी का डर नहीं

इसी साल मई में करीब 15 करोड़ रूपए की गेन्ट्री का टेंडर केवल ड़ेढ़ करोड़ रुपए में देने की तैयारी थी। उस समय 44 गेन्ट्री के लिए टेंडर निकाला था। बिल्लू बादशाह ने इसका भांडाफोड़ कर दिया था। आखिर निगमायुक्त संघ प्रिय ने टेंडर निरस्त करते हुए होर्डिंग्स शाखा के सभी स्टाफ को हटा दिया था।

क्या चहेती फर्म को टेंडर देने की तैयारी है

निगम ने शर्त लगाई है कि जिन फर्मों पर निगम की राशि बकाया है वे टेंडर नहीं डाल सकतीं। लेकिन अफसरों ने पुष्पेन्द्र सिंह भदौरिया की फर्म एसेन्ट ब्रांड कम्यूनिकेशन को अभयदान दे दिया जबकि फर्म पर निगम का 1 करोड़ 98 लाख रुपए बकाया है। महापौर की अध्यक्षता वाली निगम की अपील समिति ने इस फर्म पर लगाए गए जुर्माने को निरस्त कर दिया था। लेकिन निगमायुक्त की ओर से पुनर्विचार के लिए मामला फिर अपील समिति में भेजा है। समिति की अभी बैठक नहीं हुई है उससे पहले ही निगम ने एसेन्ट ब्रांड कम्युनिकेशन को टेंडर के लिए पात्र घोषित कर दिया और फर्म ने टेंडर भी भर दिया है।

क्या देख रहे हैं कानून के रखवाले

अवैध कमाई के लिए निगम की होर्डिंग्स शाखा हमेशा ही बदनाम रही है। निगमायुक्त संघ प्रिय सख्त है इसलिए उन्होंने पिछली पूरी टीम को ही हटा दिया था। लेकिन कुछ समय से निगम में विधि अधिकारी अनूप लिटोरिया को नियम विरुद्ध रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही हैं। उन्हें होर्डिग्स शाखा की भी जिम्मेदारी दी है कि समस्त फाइल वे देखकर ही आगे बढ़ाएंगे। अब एक काम के टुकड़े कर दो टेंडर जारी करने में उनकी अनदेखी रही है या देखा देखी का खेल चमकाया है, यह जांच का विषय है।

इनका कहना है

नियमों के तहत कार्य कराए जाने की जिम्मेदारी परिषद की है। पार्षद यदि इस मामले में आपत्ति जताएंगे तो चर्चा के बाद विधि संवत फैसला लिया जाएगा।

मनोज तोमर, सभापति

परिषद में लाएंगे

होर्डिंग्स शाखा में पहले भी घोटाले होते रहे हैं। गेन्ट्री का मामला गंभीर है। कार्य जब समान है तो टेंडर को टुकड़ों में बांटने से घोटाले का संदेह बढ़ गया है। यह फैसला परिषद को धोखा देने वाला है। हम इस मुद्दे को अभियाचित बैठक के माध्यम से परिषद में लाएंगे और आयुक्त को भी पत्र लिखकर आपत्ति जताएंगे।

हरि पाल, नेता प्रतिपक्ष ननि

चतुराई काम नहीं करेगी

चतुराई दिखाकर बचा नहीं जा सकता। टेंडर को दो टुकड़ों में करना था तो परिषद से सहमति लेना चाहिए थी। इस मामले को हम परिषद में उठाएंगे।

मनोज राजपूत, कांग्रेस पार्षद

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