कलेक्टर श्रीमती चौहान ने मंडियों में सोयाबीन की बिक्री पर रखें नजर और पात्र किसानों को दिलाएँ योजना का लाभ

0
36

ग्वालियर जिले के सोयाबीन उत्पादक किसान भी “मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना” से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सोयाबीन उत्पादक हर किसान को इस योजना का लाभ दिलाने के लिए कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अधिकारियों सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी संबंधित अधिकारी कृषि उपज मंडियों में सोयाबीन की बिक्री पर नजर रखें। साथ ही पात्र किसानों को इस योजना का लाभ दिलायें।

ग्वालियर जिले में मौजूदा खरीफ मौसम में लगभग 715 हैक्टेयर रकबे में सोयाबीन की बोनी हुई है। जिले के 15 गाँवों में निवासरत 450 किसानों ने सोयाबीन लगाया है। इन गाँवों में आरौन, पाटई, करही, सबराई, मोहना, दौरार, बड़कागाँव, बन्हेरी, बराहना, सेंकरा, दुरसेड़ी, धुंआ, झाड़ौली, महारामपुरा व सिरसा शामिल हैं। एमएसपी से कम कीमत पर सोयाबीन विक्रय पर मिलेगी भावांतर राशि अगर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से कम कीमत पर सोयाबीन बिकता है तो किसानों के घाटे की भरपाई भावान्तर योजना के तहत सरकार द्वारा की जाएगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अन्तर की राशि सीधे सरकार देगी। भावांतर योजना में किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है।
भावान्तर अवधि एक नवम्बर से 15 जनवरी तक प्रस्तावित की गई है। इस प्रकार होगा क्षतिपूर्ति का आंकलन

यदि मंडी में औसत गुणवत्ता की कृषि उपज का विक्रय मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो लेकिन राज्य सरकार द्वारा घोषित औसत मॉडल भाव से अधिक हो तो किसान को केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यदि मंडी में कृषि उपज का विक्रय मूल्य राज्य सरकार द्वारा घोषित औसत मॉडल भाव से भी कम हो तो किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य और घोषित औसत मॉडल भाव के अंतर की
क्षतिपूर्ति दी जाएगी।

LEAVE A REPLY