300 करोड़ की सरकारी जमीन का बड़ा खेलः भाग-2….,1998 में परिवहन विभाग को कर दी थी आवंटित, फिर भी हो गई निजी

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जमीन के इस खेल में कई प्रशासनिक अधिकारी-नेताओं के नामों का हो सकता है खुलासा

हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।

कैंसर पहाड़ी ने नीचे शिवपुरी लिंक रोड़ केदारपुर की सर्वे क्रमांक 482 की विवादित जमीन की कीमत वर्तमान में 100 नहीं बल्कि 250-300 करोड़ रुपए की है। इस मामले में नया खुलासा यह हुआ है कि 1998 से पहले 10 बीघा 10 विस्वा यह जमीन सरकारी थी। राज्य शासन ने 1998 को इसे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय ग्वालियर को कार्यालय एवं आवास के लिए आवंटित किया था। तत्कालीन संभागायुक्त ने इस आशय का पत्र कलेक्टर ग्वालियर को भी 4 सिंतबर 1998 को भेज दिया था।

17 फरवरी 2006 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक वृत ग्वालियर आनंद अग्रवाल, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) ओपी शुक्ला ने अपने स्टाफ के साथ मौके पर जाकर जमीन का कब्जा भी ले लिया था। इसका पंचनामा भी तैयार हुआ था। उसके बाद 1999 में फर्जी डिक्री के बाद यह जमीन मनीष वर्मा व अन्य के नाम हो गई। जिला एवं सत्र न्यायालय ने भी अपने आदेश में साफ लिखा है कि यह डिक्री फर्जी है।

अब सवाल यह खड़ा हुआ है कि इतना बड़ा मामला अब तक विवादों में ही फंसा है जबकि मौके पर खुलेआम प्लॉट बेचे जा रहे हैं। हाल ही में तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान ने इसे फिर से सरकारी घोषित कर दिया था जिस पर एसडीएम विनोद सिंह ने स्टे दे दिया है।

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इनका कहना है

केदारपुर की जमीन के मामले की पड़ताल की जा रही है। एसडीएम को जांच के निर्देश दिये हैं।

रूचिका चौहान, कलेक्टर

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