हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।
घोटालों का बेताज बादशाह बन चुके ग्वालियर नगर निगम का एक और खेल उजागर हुआ है। मप्र सरकार के ई-टेंडर पोर्टल से ग्वालियर नगर निगम गायब है। आश्चर्य यह है कि पिछले एक पखवाड़े से यह पोर्टल से गायब है फिर भी निगम के कार्यों के टेंडर अपलोड किये और खोले जा रहे हैं। इसमें तकनीकी खामी है या भ्रष्टाचार का खेल, जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।
सार्वजनिक होते हैं टेंडर

टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी करने के उद्देश्य से मप्र सरकार ने ई-टेंडर व्यवस्था लागू की है। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के सभी विभागों से जुड़े कार्यों के टेंडर अपरोड किये जाते हैं। संबंधित ठेकेदारी फर्म पोर्टल से जानकारी लेकर टेंडर अपलोड करने की प्रक्रिया करते हैं। इसे कोई भी फर्म, एजेन्सी, संस्था देख सकती है। लेकिन सरकार के इस पोर्टल से एक पखवाड़े से ग्वालियर नगर निगम गायब है।
हो चुका है ई-टेंडर घोटाला
प्रदेश में ई-टेंडर घोटाले की गूंज हुई थी, क्योंकि सेट्रलाइज्ड टेंडर व्यवस्था के तहत सॉफ्टवेयर के माध्यम से भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता है। किसे टेंडर देना है, किस फर्म का रेट कितना ब्लो है, इसे केवल कुछ चुनिंदा तय अधिकारी ही देख सकते हैं। इसमें दो साल पहले बड़े घोटाले की गूंज हुई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से इसे जोर शोर से उठाया था, लेकिन चुनाव बाद यह मामला दब गया।












