करोड़ों रुपए की जमीनः सिंधिया को फिलहाल राहत नहीं

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चेतकपुरी के सामने बंधन गार्डन के पास जमीन के मालिकाना हक को लेकर सिंधिया पहुंचे हाई कोर्ट, फिलहाल राहत नहीं

ग्वालियर। चेतकपुरी के सामने बंधन गार्डन के पास केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिजनों ने बिना अधिकार के नारायण नामक बिल्डर को जमीन बेच दी थी। इस पर बहुमंजिला इमारत खड़ी हो गई है। इस पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमीन के क्रय-विक्रय के साथ निर्माण कार्य पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यशवंत राव राणे के मालिकाना हक की जमीन मानी थी। इस फैसले के खिलाफ सिंधिया परिवार ने हाई कोर्ट की शरण ली है। अदालत ने अभी स्टे नहीं दिया है बल्कि संपूर्ण रिकार्ड तलब किया है। जमीन पर बहुमंजिला इमारत खड़ी करने में पारस जैन भी शामिल हैं।

यह है पूरा मामला
जिला एवं सत्र न्यायालय से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बड़ा झटका लगा था। कोर्ट ने कहा कि माधवीराजे सिंधिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया व चित्रांगदा सिंह ने बिना अधिकार के नारायण बिल्डर को सर्वे क्रमांक 1211/1 की 0.763 हेक्टेयर (तीन बीघा) भूमि बेच दी है। जबकि यह भूमि यशवंतराव राणे के मालिकाना हक की थी। इसलिए जमीन पर निर्माण किया जाएगा। न जमीन का किसी भी तरह से विक्रय। सिंधिया ने जमीन की रजिस्ट्री की थी, रजिस्ट्री भी शून्य मानी जाएंगी।

जमीन चेतकपुरी गेट पर स्थित बंधन गार्डन के पास है। बहु मंजिला इमारत बनाई जा रही है।
यशवंत राव राणे ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि ललितपुर मौजे की सर्वे क्रमांक 1211/1, 1211/2, 1211/3 की 6 बीघा 4 विस्वा भूमि उनके मालिकाना हक की थी। इस जमीन पर उनके पिता खेती करते थे। जमीन उनके पिता के नाम दर्ज थी, लेकिन इस जमीन के खसरा के खाना नंबर 12 में माधवराव सिंधिया का नाम दर्ज किया गया। नाम दर्ज करने से पहले न उनको नोटिस दिया गया और न सूचना दी। उन्होंने गलत तरीके से जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी की। जमीन का हिस्सा नारायण बिल्डर को बेच दिया। कोर्ट ने कलेक्टर, नगर निगम, सिंधिया, नारायण बिल्डर्स एंड डेवलपर्स से जवाब मांगा, लेकिन सिंधिया की ओर से जवाब नहीं दिया गया, जिसके चलते कोर्ट ने सिंधिया को एक पक्षीय घोषित कर दिया। वादी के अधिवक्ता आरके सोनी का कहना है कि रजिस्ट्री भी शून्य की है। सिंधिया को जमीन बेचने का हक नहीं था।
पूरे मामले को लेकर जिला एवं सत्र न्यायालय ने यह फैसला दिया था–
– सर्वे क्रमांक 1211/1 की 3 बीघा जमीन के खाना नंबर 12 में माधवराव सिंधिया का नाम कैसे आया। यह साबित करने का दायित्व माधवीराजे सिंधिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया व चित्रांगदा सिंह का था, लेकिन उन्होंने कोई मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किए।
– किस सक्षम प्राधिकारी ने कॉलम नंबर 12 में माधवराव सिंधया का नाम दर्ज किया। यह भी स्पष्ट नहीं किया।
– प्रतिवादीगण का दायित्व था कि उनके नाम जमीन का नामांतरण किसने किया। नारायण बिल्डर भी यह बताने में असफल रहा। विवादित भूमि माधवीराजे सिंधिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया व चित्रांगदा सिंह ने बेची है। सभी दस्तावेजों की विधिवत रूप से संपत्ति अंतरण अधिनियम के तहत जांच हो।
– नारायण बिल्डर ने जमीन खरीदने के बाद बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी है। इस जमीन फ्लैट तैयार कर विक्रय भी किए जा चुके हैं। साथ ही नया भवन तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा मैरिज गार्डन भी चल रहा है।

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