शिक्षा के मंदिर की लाज रखने राजभवन ने जिन 6 सभ्रांत नागरिकों को जेयू भेजा, उन पर भी 2-2 लाख लेने की चर्चा फैल गई
नोटः प्रो. गोस्वामी ने इन आरोपों पर कोई जबाव नहीं दिया जबकि कार्यपरिषद सदस्य आरोपों को वेबुनियाद बता रहे हैं। कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी का फोन आउट ऑफ रीच रहा।
हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।
हाल ही में नैक से ए प्लस प्लस का तमगा पाकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में परचम लहराने वाली जीवाजी यूनिवर्सिटी के इतिहास में सोमवार को काला दाग लग गया। नियमों का पालन न करने पर भी अंचल के 197 बीएड कॉलेजों को संबद्धता (Affiliataion) दे दी गई। संबद्धता की मंजूरी के लिए राजभवन के वे आधा दर्जन विशेष प्रतिनिधि (कार्यपरिषद सदस्य) भी सहमत हो गये जिन्होंने पिछली बैठक में मंजूरी न देकर शर्तें लगा दी थी। केवल यह शर्त जोड़ दी कि आगामी तीन माह में कॉलेज संचालक जेयू में दस्तावेज जमा कराएं। कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यपरिषद की बैठक से पहले ही जेयू में आग की तरह एक चर्चा यह फैल गई थी कि कॉलेजों से 70-70 हजार रुपये वसूले गए हैं और कुलाधिसचिव (Rector) प्रो. डीएन गोस्वामी ने करीब एक करोड़ रुपये की वसूली की है। हालांकि चर्चा का कोई सबूत नहीं मिला।

चार-चार मांगे, दो-दो लाख में मान गये
जेयू में यह चर्चा भी आग की तरह फैली कि राजभवन द्वारा मनोनीत कार्यपरिषद सदस्यों (ईसी मेंबर) ने भी संबद्धता की सहमति देने के लिए चार-चार लाख रुपए मांगे थे, बाद में डीसीडीसी ने कॉलेजों से दस-दस हजार रुपए और वसूले। इसमें से दो-दो लाख रुपए सदस्यों को देने पर सहमति बन गई। सोमवार को बैठक में राजभवन द्वारा मनोनीत छह सदस्यों में से सेवंती भगत को छोड़कर प्रदीप शर्मा, विवेक सिंह भदौरिया, शिवेन्द्र सिंह राठौर, संगीता कटारे, संजय यादव मौजूद रहे।
इसलिये कटघरे में कार्यपरिषद सदस्य
197 बीएड सहित जेयू सीमा के करीब तीन सैकड़ा कॉलेजों को सत्र 2023-24 के लिए संबद्धता के लिए निरीक्षण हुए थे। कई कॉलेज नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं। इसके बाद भी जेयू की स्थायी समिति ने 15 अप्रैल और 20 अप्रैल को बैठक में इन कॉलेजों को शर्तों के साथ संबद्धता देने की अनुशंसा की थी। जब यह मामला 28 अप्रैल को कार्यपरिषद की बैठक में पहुंचा तो राजभवन द्वारा मनोनीत सभी आधा दर्जन सदस्यों ने अपनी असहमति (Note Of Dessent) जताते हुए कहा था की समस्त कॉलेजों में नियुक्त शैक्षणिक स्टाफ के नाम और उन्हें दिये जा रहे वेतन का पिछले तीन माह का रिकॉर्ड तथा आधार कार्ड 30 अप्रैल तक जमा कराएं तभी संबद्धता दी जाएगी। लेकिन सोमवार को हुई बैठक में समस्त 197 बीएड कॉलेजों को संबद्धता दे दी गई। सामान्य पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों को अभी संबद्ता नहीं दी गई है।
प्रोफेसर सदस्यों ने भी कलंकित घटना बताया
पैसे खाकर संबद्धता देने से जेयू की प्रदेश भर में किरकिरी होना थी, क्योंकि हाल ही में इसे ए डबल प्लस मिला है, इसलिए सोमवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक से प्रो. एके सिंह, प्रो. आईके पात्रो तथा प्रो. वायके जायसवाल ने दूरियां बनाई और बैठक में नहीं पहुंचे।
इनका कहना है
मेरे पर भी पैसों का ऑफर था, लेकिन मैंने मना कर दिया। हालांकि तीन माह का समय देने में मेरी भी सहमति रही लेकिन बैठक के बाद मुझे लगा कि गलती हो गई है।
विवेक भदौरिया, ईसी मेंबर
-कॉलेजों को तीन माह का समय देने की शर्त के साथ संबद्धता दी है। पैसे लेनदेन के आरोप निराधार हैं।
शिवेन्द्र सिंह राठोर, ईसी मेंबर
-पैसे लेकर सहमति देने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। दस्तावेज जमा करने के लिए तीन माह का समय दिया है।
प्रदीप शर्मा, ईसी मेंबर












