जीवाजी यूनिवर्सिटी में इतिहास परिषद का 40 वा अधिवेशन शुरू
ग्वालियर,
पानी के अंदर भी एक दुनिया है जिसमें इतिहास छिपा है। इसका कई विधियों द्वारा अवशेषों का अध्ययन किया जाता है। हम ऐसा काम करें जिससे आने वाली पीढ़ी हमें याद करें। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक प्रो.आलोक त्रिपाठी ने यह बात कही। वे जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास,संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से आयोजित म.प्र.इतिहास परिषद के तीन दिवसीय 40वें अधिवेशन में शुक्रवार मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
जेयू के गालव सभागार में आयोजित उद्घाटन संत्र में प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि मेरा कभी उद्देश्य नहीं था कि मैं आर्कियोलॉजिस्ट बनूंगा इसका श्रेय डॉ.वीएस वाकनकर को जाता है जिनकी वजह से मैं आर्कियोलॉजिस्ट बना।मेरा पहला शोध पत्र वाकनकर ने ही प्रकाशित किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि पुरातत्व के क्षेत्र में तमिलनाडु सबसे अधिक कार्य कर रहा है अन्य राज्यों को भी इसमें आगे आना चाहिए। आर्कियोलॉजी बिना इमेजिनेशन के नहीं हो सकती हमको करना पड़ेगा। अपने इतिहास को पुनः देखें अपनी दृष्टि से देखें अपनी शब्दावली स्वयं निर्मित करें तभी आप इतिहास को समझ सकते हैं।
जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि आर्कियोलॉजी विभाग में सेमिनार होते रहते हैं जिससे छात्रों को काफी मदद मिलेगी।रिवर इको सिस्टम से भी हम पुरातत्व के बारे में काफी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग के लिए एक म्यूजियम बनाया जाएगा। म्यूजियम बहुत ही मुख्य भाग होता है जो इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सहायक होता है। उद्घाटन सत्र में प्रो.आलोक त्रिपाठी,प्रो.आलोक श्रोत्रिय,प्रो.बीके श्रीवास्तव,नवीन गिडियन,रेक्टर डीएन गोस्वामी,कुलसचिव डॉ.आरके बघेल सहित गणमान्य लोगों के सामूहिक रूप से द्वीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ।
कार्यक्रम में सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान म.प्र.इतिहास परिषद के 39वें अधिवेशन में प्रस्तुत किए गए प्रमुख शोध पत्रों का 40वें अधिवेशन ग्वालियर में शोध पत्र पुस्तिका (जर्नल) के रूप में विमोचन किया गया। कार्यक्रम में दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।जिसमें पचास से साठ शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।कार्यक्रम के अंत में म.प्र. इतिहास परिषद के स्थानीय सचिव डॉ.शांतिदेव सिसौदिया के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।कार्यक्रम में मंच का संचालन उर्वशी राठौर एवं समीक्षा भदौरिया व आभार डॉ.शांतिदेव सिसौदिया ने व्यक्त किया। इस अवसर पर रेक्टर प्रो. डीएन गोस्वामी,कुलसचिव डॉ.आरके बघेल,कार्य परिषद सदस्य गण डॉ.शिवेंद्र सिंह राठौर,डॉ. संगीता कटारे,सेवंती भगत, डॉ.हरेंद्र शर्मा,प्रो.आरए शर्मा, प्रो.समीर भाग्यवंत,प्रो.एमके गुप्ता,डॉ.एसएन महापात्रा,डॉ.केशव सिंह गुर्जर,प्रो.एके सिंह,डॉ.निमिषा जादौन,डॉ.रामशंकर सिंह,प्रो.नलिनी श्रीवास्तव,पीआरओ डॉ.विमलेंद्र राठौर सहित ख्यातिप्राप्त विद्वान व शोधार्थी उपस्थित थे।












