कोर्ट ने आयुक्त के मोबाइल में मौजूद वीडियो, फोटो और व्हाट्सऐप निर्देशों को डिजिटल रूप में पांच पेन ड्राइव में सुरक्षित कराने के निर्देश दिए हैं।
हरीश चन्द्र, ग्वालियर, 18 अगस्त 2026। ग्वालियर की बेटी बचाओ सड़क से गुड़ा-गुड़ी का नाका तक की जर्जर सड़क को लेकर चल रही रिट याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने सड़क की सैंपलिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि 19 अगस्त को आयोग, तकनीकी टीम, सभी संबंधित पक्षों के अधिवक्ता, नगर निगम, राज्य और NHAI के प्रतिनिधि तथा ग्वालियर SSP की मौजूदगी में सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी संबंधित लोग सुबह 11:45 बजे हाईकोर्ट परिसर में एकत्र होंगे और दोपहर 12 बजे बस से सैंपलिंग स्थल के लिए रवाना होंगे। कोर्ट ने कहा है कि सैंपल लेने या उसकी जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह का हस्तक्षेप हुआ तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। याची के वकील अवधेश सिंह तोमर ने भी अपना पक्ष रखा।

मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने शपथपत्र देकर स्वीकार किया कि बेटी बचाओ रोड से गुड़ा-गुड़ी का नाका तक की सड़क काफी लंबे समय से बेहद जर्जर स्थिति में थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोर्ट की अनुमति लिए बिना सैंपलिंग से महज दो दिन पहले सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की बड़े स्तर पर मरम्मत कर दी गई। आयुक्त ने अदालत से माफी भी मांग ली।
सीवेज लाइन के कारण नहीं बनी सड़क
नगर निगम आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि सीवेज लाइन बिछाने के बाद जमीन को पूरी तरह बैठने में समय लगता है और जमीन के ठीक से सेटल नहीं होने के कारण सड़क बार-बार खराब हो रही है। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि आयुक्त इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक या तकनीकी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। उनके पास यह बताने के लिए भी कोई दस्तावेज नहीं था कि जमीन को कंप्रेस करने के लिए किस प्रकार की मशीनरी का इस्तेमाल किया गया और जमीन को स्थिर होने में कितना समय लगना चाहिए।
19 अगस्त को होगी सड़क की सैंपलिंग
कोर्ट ने सीवेज लाइन से संबंधित टेंडर, DPR, तकनीकी स्पेसिफिकेशन और जमीन के कंप्रेशन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए आयुक्त को समय दिया। कोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि सड़क से लिए गए सैंपल मौके पर ही सील किए जाएंगे। एक सैंपल जिला न्यायालय के मालखाने में, एक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की टेस्टिंग लैब और एक PWD टेस्टिंग लैब को भेजा जाएगा। चौथा सैंपल नगर निगम के पास सुरक्षित रखा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट मालखाने में रखे सैंपल को देश की किसी प्रतिष्ठित लैब से दोबारा जांच के लिए भेज सकेगा। कोर्ट ने पहले शॉर्टलिस्ट की गई सड़कों की सूची भी वापस ले ली है। अब आयोग को अपनी पसंद की किसी भी सड़क से सैंपल लेने की स्वतंत्रता होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग जिस सड़क से सैंपल लेने वाला होगा, उसकी जानकारी रवाना होने से केवल 30 मिनट पहले दी जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के अधिवक्ता को सड़क के चयन को लेकर आयोग को सुझाव देने की अनुमति नहीं होगी।
4.76 करोड़ की सीवेज परियोजना, 2.75 करोड़ जारी
दोपहर एक बजे बाद मामले की दोबारा सुनवाई हुई। नगर निगम आयुक्त एक फाइल लेकर कोर्ट में उपस्थित हुए, लेकिन कोर्ट के सवालों पर यह सामने आया कि सीवेज लाइन बिछाने से संबंधित Measurement Book उनके पास नहीं थी।आयुक्त ने बताया कि सीवेज लाइन बिछाने का टेंडर 31 जनवरी 2024 को जारी हुआ था और 9 जुलाई 2024 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया। इस पूरे काम की लागत करीब 4.76 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 2.75 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। अंतिम किस्त के रूप में 68 लाख रुपये 1 जनवरी 2026 को जारी किए गए। इसके बावजूद अभी तक काम का Completion Certificate जारी नहीं हुआ है।
31 मार्च के बाद भी काम अधूरा, कोर्ट ने जताई नाराजगी
कोर्ट को बताया गया कि सीवेज लाइन का काम पहले छह महीने में पूरा होना था, लेकिन कई बार समय सीमा बढ़ाई गई। अंतिम समय सीमा 31 मार्च 2026 थी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नगर निगम ने कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नगर निगम 31 मार्च के बाद सोता रहा और 16 अगस्त 2026 को तब जागा, जब उसे पता चला कि उसके काम की सैंपलिंग होने वाली है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम का काम अधूरा छोड़ने का रवैया ग्वालियर के नागरिकों की जान को खतरे में डाल रहा है। इस पूरे मामले में मुख्य सचिव और संबंधित विभाग को भी विचार करना चाहिए कि क्या शहर के प्रशासन को इसी तरीके से चलाया जाना चाहिए।
व्हाट्सऐप पर सरकारी निर्देशों पर भी सवाल
नगर निगम आयुक्त ने स्वीकार किया कि राज्य सरकार की ओर से सरकारी काम के लिए व्हाट्सऐप पर निर्देश जारी करने का कोई विशेष आदेश नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि काम की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने व्हाट्सऐप का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने आयुक्त के मोबाइल में मौजूद वीडियो, फोटो और व्हाट्सऐप निर्देशों को डिजिटल रूप में पांच पेन ड्राइव में सुरक्षित कराने के निर्देश दिए हैं। सभी पेन ड्राइव फिलहाल कोर्ट की अभिरक्षा में रहेंगी। रिट याचिका की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।












