साइकिल से आए, अब हेलीकॉप्टर खरीदने की ताकत रखते हैं कॉलेज संचालक
हरीश चन्द्र कुशवाह, ग्वालियर।
शिवशक्ति कॉलेज झुंडपुरा मुरैना के फर्जीवाड़े ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी को बर्खास्त कराकर धारा 52 लगवा दी। डॉ. अरुण शर्मा की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने EOW को अन्य कॉलेजों की जांच के निर्देश दिये हैं। इस घटना के बाद फर्जीवाड़ा करने वाले कॉलेज संचालकों में दहशत है, लेकिन उन्हें इस प्रकार की समस्याओं को चुटकी से हल करने की महारत है इसलिए वे फिर एकजुट हुए हैं और चंदा शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो टारगेट 2 करोड़ रुपए का रखा है। इस पैसे से वे EOW, जीवाजी यूनिवर्सिटी और मीडिया को खरीदने की योजना पर काम करने लगे हैं। लगातार बैठकों का दौर जारी है। अब तक 17 कॉलेजों ने सहमति बना ली है। देखना है कि वे इसमें कितना सफल होते हैं।
साइकिल से आए, अब हेलीकॉप्टर खरीदने की ताकत
साइकिल से सफर कर जीवाजी यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाकर, कर्ज लेकर कॉलेज खोलने वाले कई कॉलेज संचालक शिक्षा माफिया डॉन बन चुके है। डीएड, बीएड, नर्सिंग कॉलेजों के कई संचालक पिछले 15 साल के फर्जीवाड़े के बाद अब हेलीकॉप्टर खरीदने की ताकत रखते हैं। इतना ही नहीं, कॉलेजों का निरीक्षण करने वाले जीवाजी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के भी कई प्रोफेसर इस काले धंधे में हाथ काले कर करोडपति बन चुके हैं। बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा करने में भिंड में ऐसे कॉलेजों की संख्या 19, मुरैना में 23, दतिया में 15, ग्वालियर में 23 बताई जा रही है। जेयू के अधिकार क्षेत्र के अन्य जिलों में भी ऐसे ही हालात हैं। जेयू के निरीक्षण दलों की रिपोर्ट देखने के बाद ऐसे कई अन्य कॉलेजों का भंडाफोड़ हो जाएगा जो केवल कागजों में चल रहे हैं। अब देखना है कि कलेक्टर और जेयू की जांच टीमें ऐसे माफियाओं के कॉलेजों तक पहुंच पाती हैं या मामला सुलट जाता है।
बिल्डिंग कहीं, जमीन कहीं
ज्यादातर कॉलेजों में परिनियम 28(17) के तहत शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति केवल निरीक्षण के दौरान की जाती है। करीब 87 कॉलेज ऐसे हैं जिनके भवन कहीं हैं जबकि कागजों में उनके खसरा नंबर कहीं ओर हैं। जिला प्रशासन व जेयू अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे कॉलेज फलफूल रहे हैं। कलेक्टर और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक द्वारा गठित जांच दलों ने कई कॉलेजों के फर्जीवाड़े पकड़े लेकिन जांच टीम मौन साध गई हैं। इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
क्या जांच कर सकेगा EOW
जेयू से करीब 400 निजी कॉलेज जुड़े हैं। पिछले 15 साल से उनकी निरीक्षण रिपोर्ट निकाली जाए तो 80 फीसदी फर्जी साबित हो जाएंगे। डॉ. अरुण शर्मा ने मुरैना के झुंडपुरा के शिवशक्ति कॉलेज का फर्जीवाड़ा उजागर किया, इसके बाद जेयू में धारा 52 लगी। अब जांच ईओडब्ल्यू के हवाले है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या इओडब्ल्यू ईमानदारी से सभी कॉलेजों की जांच कर सकेगा।
इनका कहना है
शासन ने कॉलेजों की जांच का आदेश दिया है। हमने लीड कॉलेजों को जांच की जिम्मा सौंपा था। अब कलेक्टर द्वारा जांच कराई जा रही है।
प्रो. के रत्नम, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा
-जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू को कॉलेजों की जांच के निर्देश दिये हैं। जांच के बाद झुंडपुरा जैसे कई कॉलेजों का फर्जीवाड़ा उजागर हो सकता है।
अवधेश सिंह भदौरिया, एडवोकेट












