उच्च शिक्षा का गिरता स्तर, गेस्ट फैकल्टी के भरोसे पढ़ाई
हरीश चन्द्र, ग्वालियर।
उच्च शिक्षा में पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। प्राइवेट संस्थान केवल चमक-दमक और बड़े-बड़े विज्ञापन के भरोसे उच्च रैंक पा रहे हैं तो सरकारी संस्थान सुविधाओं के संकट का दंश झेल रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अधिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, कारण यह कि सरकारी संस्थान पूरी तरह सत्ता के चंगुल में फंस चुके हैं। शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि गरीब तो पहले ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से वंचित था, अब मध्यम वर्गीय परिवार भी महंगाई का दंश झेल रहा है। गरीब और अमीर के बीच खाई गहरी होती जा रही है। ऐसे में छात्र तनाव में रहते हैं। आर्थिक असमानता के हालातों में चहुंमुखी विकास तो प्रभावित होगा ही। शिक्षा का स्तर लगातार घटते जाने की समस्या के कई कारण और समाधान हो सकते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख कारण और समाधान दिए गए हैं:

स्तर घटने जाने के कुछ कारण
अनुभवहीन और अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं, शिक्षा संस्थानों में आवश्यक संसाधनों की कमी, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में कमी, विद्यार्थियों में कक्षा में अध्ययन के प्रति घटती रुचि, शिक्षा में आधुनिक तकनीक का क्षमता के अनुरूप उपयोग नहीं, गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता के कारण शिक्षा की ओर ध्यान नहीं देना।
यह हो सकते हैं समाधान
शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण और विकास के अवसर प्रदान करना, शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, शिक्षा संस्थानों में आवश्यक संसाधनों की वृद्धि करना, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार करना, विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए आकर्षक और गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियों का उपयोग करना, शिक्षा में आधुनिक तकनीक का उपयोग करना, शिक्षा नीतियों में सुधार करना और उन्हें व्यावहारिक बनाना, गरीब और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना और आर्थिक समर्थन देना।












