केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जयभान सिंह पवैया के आवास पहुंचे ,दोनों नेताओं की बंद कमरे में हुई

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ग्वालियर,

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार को BJP के वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया के यहां पहुंचे

पवैया की चाची के देहांत पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे सिंधिया
सिंधिया और जयभान सिंह पवैया ने इस मुलाकात को औपचारिक बताया।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पुलवामा हमले पर कांग्रेस नेताओं के सवाल खड़े करने पर निशाना साधा……
सिंधिया ने तल्ख अंदाज में कहा
जो लोग हमारे जवानों ने देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए अपनी रक्त की एक एक बूंद का बलिदान दिया जो लोग उनका सम्मान नहीं कर पाते, वो क्या भारत जोड़ेंगे? जो लोग उसकी व्याख्यान कर रहे हैं उनकी जितना निंदा की जाए उतना कम है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने घर आने को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता जय भान सिंह पवैया ने कहा मेरी पूज्य चाची के देहांत पर शोक संवेदना व्यक्त करने सिंधिया जी मेरे घर आए हैं ,वैसे भी मेरे जीवन में रहस्यमई बातें कुछ है नहीं, मैं सिद्धान्तों की राजनीति करता हूं,इसलिए इसे किसी राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, इसे कूटनीति रणनीति राजनीति जैसी शब्दावली की दृष्टि से भी नहीं देखना चाहिए, दो नेताओं की मुलाकात होती है, तो राजनीति पर भी चर्चा होती है,
पुलवामा हमले को लेकर जय भान सिंह पवैया ने भी कांग्रेस और दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, देखिए यह हिंदुस्तान किसी भी दल की 100 गलती माफ कर सकता है, लेकिन शहीदों के खून का मजाक उड़ाने वाला को हिंदुस्तान की जनता इतिहास के कूड़ेदान में फेंक देती है, आज कम्युनिस्टों दुर्दशा के पीछे भी वही कारण है, जो कांग्रेस भारत को जोड़ने की की बात करती है उस कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए पुलवामा की शहादत और बालाकोट स्ट्राइक को झूठा ठहराने वालों को” चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए” ऐसे दलों का हिंदुस्तान के प्रजातंत्र में कोई आवश्यकता नहीं है “जनता नकार देगी इन्हें”बीजेपी के वरिष्ठ नेता जय भान सिंह पवैया ने कमलनाथ के बागेश्वर धाम पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात करने पर कहा, कोई भी नेता संतो और धर्माचार्यों के पास जा सकता है ,लेकिन धर्म आचार्यों का अनुभव पुराना है ,भारतीय जनता पार्टी 365 दिन हिंदुत्व के लिए काम करते हैं “लेकिन कांग्रेसी मृग मारीच की तरह सोने की खाल ओढ़कर कुछ महीनों के लिए मंदिरों के चक्कर लगाते हैं”।

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