महान समाजसुधारक, क्रांतिकारी महात्मा ज्योतिवाराव फुले की आज 197वीं जयंती हैं।
उनके अनमोल विचार पढ़ें और जीवन में आत्मसात करें
-महिलाओं को स्वतंत्रता से जीने के लिए रूढ़िवादी विचारों वाले समाज में सुधार लाने के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले का विशेष योगदान रहा है।
-ज्योतिबा फुले का पूरा नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले है। 11 अप्रैल 1827 में पुणे के गोविंदराव और चिमनाबाई के घर में ज्योतिराव का जन्म हुआ था।
-माली समाज के फुले का परिवार मराठा पेशवाओं के लिए गजरा बनाते थे। इसलिए उन्हें माली कहा जाता था। मराठी में उन्हें फुले कहा जाता था।
-उस दौर में महिला विरोधी कुरीतियां फैली हुईं थीं। बाल विवाह, महिलाओं और विधवाओं का शोषण आम बात थी। लेकिन ज्योतिराव फुले ने महिला विरोधी कुरीतियों और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। 19वीं सदी के महान समाज सुधारकों में ज्योतिबा फुले का नाम शामिल हैं, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया। जीवन भर उन्होंने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने, बाल विवाह के खिलाफ और विधवा विवाह के समर्थन में कार्य किया और महिलाओं के लिए स्कूल भी खोला।
-ज्योतिबा फुले पढ़ने में बहुत तेज थे। जिस स्कूल में उन्हें पढ़ने के लिए भेजा गया, वहां के टीचर्स भी उनकी कुशाग्र बुद्धि की तारीफ करते थे, इसके बाद भी उन्होंने 7 कक्षा की पढ़ाई 21 साल की उम्र में पूरी की।
-ज्योतिबा ने जब स्कूल की पढ़ाई शुरू की तो ये बात उनके कुछ रिश्तेदारों और परिचितों को अच्छी नहीं लगी। उन्होंने उनके पिता को ये कहना शुरू किया कि पढाई से बेटा किसी काम का नहीं रह जाएगा। वह कामधाम छो़ड़ देगा। आखिर पिता गोविंद राम ने उनकी स्कूल की पढ़ाई छुड़वा दी।
दोबारा बड़े होकर स्कूल पढ़ने गए
हालांकि इसके बाद भी वह घर पर किताबें पढ़ते थे। तेज दिमाग के थे तो जो भी काम करते थे, उसमें उनकी तेज बुद्धि लोगों को चकित कर देती थी। जिसकी लोग तारीफ भी करते थे। बाद में वह परिवार से जबरदस्ती करके फिर स्कूल पढ़ने गए। तब तक उनकी उम्र ज्यादा हो चुकी थी। उसी वजह से उन्होंने अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढ़ाई 21 साल की उम्र में पूरी की।












