वर्क आर्डर जारी होने के बाद ही नहीं किया काम, धरोहर/ईएमडी राशि राजसात
सिटीरपोर्टर ग्वालियर।
ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने पहली बार ठेकेदारों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है ।वर्क आर्डर जारी होने के बाद भी काम न करने पर 7 फर्म 2 साल के लिए ब्लैक लिस्ट करते हुए उनकी धरोहर राशि / ईएमडी राशि राजसात कर ली है।
लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त हुए नगम आयुक्त
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा शहर विकास एवं निर्माण कार्यों को लेकर निरंतर गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रहे हैं तथा कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदारों पर भी सख्ती से पेश आ रहे हैं। इसी क्रम में सड़क निर्माण कार्य के टेंडर स्वीकृत होने के बाद भी कुछ ठेकेदारों द्वारा न तो समय पर कार्य किया जा रहा है और न ही अनुबंध संपादित किए जा रहे हैं। जिसको लेकर निगमायुक्त ने 07 ठेकेदारों के खिलाफ कडी कार्यवाही की है।
इन फर्म पर हुई कार्यवाही
जिसमें मैसर्स श्री श्याम हरीशरण इंटरप्राइजेज का वार्ड 31 में कांति नगर एवं गायत्री नगर की विभिन्न गलियों में सीसी रोड निर्माण कार्य का कार्यादेश 04 सितम्बर 2024 को जारी किया गया था। परंतु संबंधित ठेकेदार द्वारा 22 अगस्त 2025 तक भी कार्य प्रारंभ न करने पर 2 वर्षों के लिए निविदा प्रक्रिया से प्रतिबंेधित करते हुए धरोहर राशि राजसात की गई है।
इसके साथ ही मैसर्स दिनेश आर्य का वार्ड 23 में जोधा नगर गली नम्बर 1,2 व 3 तीन में निर्माण कार्य का टेंडर स्वीकृत हुआ था, मैसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन का वार्ड 30 में देवाशीश एनक्लेव में सीसी रोड फर्स निर्माण का टेंडर स्वीकृत हुआ था, मैसर्स बाबा मोर्धन इंटरप्राइजेज का वार्ड 1 जिन्नातों की मस्जिद के पास सामुदायिक भवन, टॉयलेट एवं बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य का टेंडर स्वीकृत किया गया था, मैसर्स समाधिया कंस्ट्रक्शन का वार्ड 17 में कांच मिल शीतला माता मंदिर के पास सीसी रोड निर्माण कार्य का टेंडर स्वीकृत हुआ था, मैसर्स नक्षत्र इन्फ्राटेक का वार्ड 24 में सुरेश नगर साईनाथ कोचिंग सेंटर एवं अमर ज्योति स्कूल वाली गली में सीसी रोड निर्माण का टेंडर स्वीकृत हुआ था तथा मैसर्स वीर सिंह कन्सट्रक्शन का वार्ड 19 शिवेन्द्र सिंह चौहान के मकान से चौरसिया के मकान तक सीसी रोड निर्माण एवं 60 फुटा रोड से कुंज विहार फेस-1 तक सीसी रोड निर्माण तक का टेंडर स्वीकृत किया गया था। लेकिन इन सभी ठेकेदारों द्वारा काफी समय निकल जाने के बाद भी बार-बार सूचना देने पर भी संबंधित ठेकेदारों द्वारा अनुबंधित संपादित नहीं करने पर दो वर्ष तक टेंडर प्रक्रिया से प्रतिबंधित करते हुए धरोहर राशि राजसात की गई।












