फिर “वसूली” के लिए निकला अवैध कॉलोनियों का “जिन्न”

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नेताओं ने और अधिकारियों की मिलीभगत से फलफूल रहा अवैध कॉलोनियों का कारोबार

हरीश चन्द्र, ग्वालियर।

अवैध कॉलोनियों का जिन्न बोतल से फिर बाहर निकला है। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिये कि अवैध कॉलोनियों और उन्हें बसाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। अब इस खबर की पड़ताल में जाकर दिमाग पर यह भी जोर डालना जरूरी है कि क्या इस प्रकार के आदेश-निर्देश अवैध को वैध करने, अवैध को रोकने या अवैध के नाम पर वसूली के लिए अभियान चलाते हैं। सवाल यह भी है कि जब राजनेता ही प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से माफिया बने हुए हैं और उच्च स्तर के अधिकारी नियमों के पालन की शपथ भूल चुके हैं तो फिर अच्छे परिणाम कहां से आएंगे। पिछले कुछ घटनाक्रमों पर नजर दौड़ाइये और आप ही तय कीजिये की सच्चाई क्या है।

विधानसभा चुनाव से पहले आती है याद

-हम आपको 24 साल पहले ले चलते हैं। तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने 2000 में अवैध कॉलोनियों को वैध करने का फैसला लिया था। प्रदेश में 3 फरवरी 2000 को सरकार ने शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीनों को अर्बन सीलिंग घोषित कर दिया था। इसके बाद भी सीलिंग की जमीनों पर अवैध रूप से कॉलोनियों और मकानों का निर्माण होता रहा, लेकिन उन्हें वैध करने के नियम नहीं थे। वर्ष 4 मई 2002 को तत्कालीन दिग्विजय सरकार ने इन कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय तो लिया, लेकिन इसका पालन नहीं हो पाया।

-प्रदेश में भाजपा दूसरी पर सरकार बनाने का प्रयास कर रही थी। इसलिए चुनाव से पहले फिर जिन्न बाहर आया और 2013 में निगम एक्ट के तहत अवैध कॉलोनियों को वैध करने के प्रयास किये गये। ग्वालियर में ही 40 कॉलोनाइजरों को नोटिस थमाए गए। हालांकि राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं हो पाई।

-बात 4 मई 2018 से करते हैं। विधानसभा चुनाव आने को थे। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अवैध कॉलोनी को अवैध संतान की संज्ञा दी थी। अवैध कॉलोनियों को वैध करने 4 मई को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम हुआ जिसमें ग्वालियर की 696 सहित प्रदेश में 6876 कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा की गई। लेकिन नियम कठिन थे इसलिए ज्यादा अमल नहीं हो सका।

-2018 में भाजपा सरकार विदा हो गई। इसी बीच 2019 में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने अवैध कालोनियों को वैध करने वाली धारा 15ए को खत्म कर दिया है। हाईकोर्ट ने अवैध कॉलोनियों को बसाने के जिम्मेदारों अफसर व कॉलोनाइजर के खिलाफ निगम एक्ट के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी बीच कांग्रेस सरकार गिर गई। उधर धड़ाधड़ अवैध कॉलोनियां बसती गईं। इसमें राजनेता प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे। आखिर भाजपा सरकार ने फिर नियमों शिथिल किए।

-अवैध कॉलोनी बनाने वालों को 7 साल तक की सजा, 10 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया। कंपाउंड के नियम शिथिल किये गए। लेकिन कुछ कॉलोनी ही वैध हो सकी। जितनी वैध हुईं उससे चार-पांच गुना अवैध बस गईं।

-2023 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवराज सरकार को फिर अवैध की याद आई और सीएम शिवराज ने घोषणा कर दी कि दिसंबर 2016 से दिसंबर 2022 के बीच बनी अवैध कॉलोनियों को वैध किया जाएगा।

मोहन सरकार ने पलट दिया शिवराज सिंह चौहान का फैसला

प्रदेश में सरकार तो भाजपा की बनी लेकिन सीएम बदल गये। नए सीएम डॉ. मोहन यादव ने शिवराज सरकार का फैसला पलटते हुआ घोषणा कर दी कि अवैध तरीके से कॉलोनी बनाने से सरकार और जनता का नुकसान होता है, इसलिए इन्हें वैध करना न्याय संगत नहीं है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि जो अवैध है, वह अवैध ही रहेगी।

इनका कहना है

अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की योजना तैयार है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिये हैं। नगर निगम प्रशासन को भी अवैध कॉलोनियों की सूची भेजी है।

रूचिका चौहान, कलेक्टर ग्वालियर

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