आदिम जाति कल्याण विभाग में आतंक, ठंडे बस्ते में पीड़ितों की पीड़ा
हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।
भ्रष्टाचार के नाम पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य को तो भाजपा जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है लेकिन पिछले 20 साल से मप्र में सत्ता पर काबिज इसी दल की सरकार के राज में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। ग्वालियर के आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले से सरकार की नीति और नियत उसे कटखरे में खड़े कर रही है। इस विभाग में व्याख्याता पुरुषोत्तम शर्मा भ्रष्टाचार के आरोप में न केवल आकंठ तक डूबे हैं बल्कि तथ्यों को छिपाते हुए उन्होंने इस विभाग में संभागीय उपायुक्त का पद भी हथिया लिया है। मामला तब गंभीर हो जाता है जब भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने वाली जांच एजेन्सी EOW भी पुरुषोत्तम शर्मा जैसे भ्रष्टों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के 14 साल पुराने इस मामले में शासन से अभियोजन की स्वीकृति मिलने के डेढ़ साल बाद भी EOW ने अब तक अदालत में आपराधिक मामला चलाने के लिए चालान प्रस्तुत नहीं किया है।

भ्रष्टाचार के आरोपी पुरुषोत्तम शर्मा की कहानी
1.एक करोड़ से अधिक के घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में अपराध क्रमांक 23/2013 में अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं पिछड़ा वर्ग विकास विभाग ग्वालियर संभाग के व्याख्याता पुरुषोत्तम शर्मा और स्टोर कीपर कामता प्रसाद सहित चार आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, भा.द.स. व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) सीडी, 13(2) के तहत अपराध दर्ज है। इन्होंने शासन को एक करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। आरोपी कर्मचारियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार करके उनके माध्यम से छपाई कार्य कराकर 82.00 लाख रुपये की राशि का दुरुपयोग करके शासन को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति के छात्रावासों में भण्डार क्रय नियमों का उल्लंघन करके आवश्यकता से अधिक घटिया स्तर की सामग्री क्रय करके 35.00 लाख रुपये की शासन को क्षति पहुंचाई गई है।

- यह कि पुरुषोत्तम शर्मा का मूल पद व्याख्याता कृषि विज्ञान है। आरोपी कर्मचारी उनके खिलाफ आर्थिक अपराध के दर्ज अपराध क्रमांक 23/2013 की जानकारी को छुपाते हुए क्रमोन्नति, पदोन्नति तथा समयमान वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने लाखों रुपये की एरियर राशि सरकारी खजाने से प्राप्त कर ली है जो कि पूरी तरह नियम विरुद्ध होकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की स्पष्ट कार्यवाही की गई है।
- इसी तरह पुरुषोत्तम शर्मा ने उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में दर्ज अपराध की जानकारी छुपाते हुए डिप्टी कमिश्नर अनुसूचित जाति, जनजाति का पद पा लिया है। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट निर्देश है कि जिन कर्मचारियों के विषय में अपराधिक प्रकरण/अनुशासनात्मक कार्यवाही / जांच लम्बित रहती है उन्हें क्रमोन्नति/पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा सकता।
- यह कि मध्यप्रदेश शासन की स्पष्ट नीति है कि शासकीय धन के दुरुपयोग एवं आर्थिक क्षति के प्रकरणों में अपराध दर्ज होने पर आरोपी कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नहीं रखा जाता है। लोकायुक्त तथा आर्थिक अपराध ब्यूरो में दर्ज होने के बाद आरोपियों को या तो निलम्बित कर दिया जाता है या उनको तत्काल उसी स्थान या कार्यालय से हटा दिया जाता है। अनूसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के संभागीय कार्यालय ग्वालियर में आर्थिक अपराध क्रमांक 23/2013 के आरोपी पुरुषोत्तम शर्मा व्याख्याता कृषि विज्ञान जो कि सहायक नियोजन अधिकारी के रिक्त पद के विरुद्ध वर्ष विगत 17 वर्षों से तथा स्टोरकीपर कामता प्रसाद पिछले 25 वर्षों से आज तक ग्वालियर में ही काम कर रहे हैं।
इनका कहना है
EOW की प्रारंभिक जांच में व्याख्याता पुरुषोत्तम शर्मा सहित चार पर भ्रष्टाचार के आरोप पुष्ट हो चुके हैं। इसके बाद भी उन्होंने तथ्य छिपाकर संभागीय उपायुक्त का पद हथिया लिया है। इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू, प्रमुख सचिव से की है।
राकेश सिंह कुशवाह, आरटीआई एक्टिविस्ट
शिकायत मिली है। हम जांच करा रहे हैं। इसके बाद उचित कार्रवाई करेंगे।
सुदाम खांडे, संभागायुक्त, ग्वालियर संभाग












