ग्वालियर। हाई कोर्ट की युगल पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जीवाजी विश्विद्यालय के सत्र 2019 के बीएससी नर्सिंग रिजल्ट में हुए फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने तथ्य छिपाने का हवाला देते हुए दोनों याचिकार्ताओं पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगा दिया है। हर्जाने की राशि सात दिन में अदा करनी होगी।
2019 में कराई थी परीक्षा

दरअसल जीवाजी विश्वविद्यालय ने सत्र 2019 के बीएससी नर्सिंग विद्यार्थियों की परीक्षा कराई थी। इस परीक्षा में अधिकतर विद्यार्थी फेल थे। रिजल्ट घोषित होने के बाद विद्यार्थियों ने न पुर्नमूल्यांकन का आवेदन दिया और न कोई आवेदन किया, लेकिन जेयू के अधिकारियों ने टेबुलेशन चार्ट में टेंपरिंग कर फेल विद्यार्थियों को पास कर दिया था। फर्जीवाड़ा सामने आने पर जेयू ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया, लेकिन दो साल में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जांच के लिए जो कमेटियां बनाईं, वे भी निष्कर्ष नहीं दे सकीं। इसको लेकर सर केपी सिंह और पूर्व कार्य परिषद सदस्य अनूप अग्रवाल ने जनहित याचिका दायर की थी अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने कोर्ट को बताया पहले भी इस तरह की याचिका दायर की थी। उसका निराकरण हो गया है। इसलिए मामला सुनवाई योग्य नहीं है। तथ्यों को छिपाने का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोनों पर हर्जाना लगाया है।












