अंधेर नगरीः फर्जी दस्तावेज लगाकर डॉक्टरों की पत्नियों को ही मेडिकल कॉलेज में दे दी नौकरी

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शिकायत के बाद संभागायुक्त ने कराई जांच, बिल्लू बादशाह रिपोर्टर पर हैं फर्जी दस्तावेज

हरीश चन्द्रा, ग्वालियर।

कहीं पैसों का लेनदेन तो कहीं भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार ने योग्य लोगों की कमर तोड़ दी है। अपनी पत्नियों को नौकरी दिलाने के लिए ऐसा ही एक बड़ा फर्जीवाड़ा ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GR Medical Collage) में डॉक्टरों ने ही कर दिखाया। साइंटिस्ट के तीन पदों पर फर्जी दस्तावेज लगाकर दो डॉक्टरों की पत्नियों और एक भतीजी को नौकरी दे दी गई। तीनों ही ड़ॉ़क्टर जीआर मेडिकल कॉलेज के ही हैं।

इसमें पैथोलॉजी विभाग के डॉक्टर अमित निरंजन की पत्नी शुभ्रा सिंह को साइंटिस्ट के ग्रुप बी, फिजियोलॉजी विभाग में पदस्थ डॉ. विकास जैन की पत्नी को ग्रुप सी तथा फार्मेकोलॉजी विभाग में पदस्थ डॉ. एके जैन की भतीजी मीनू जैन को ग्रुप डी में नौकरी दी गई है। जब शिकायत हुई और दस्तावेज की जांच पड़ताल चली तब फर्जीवाड़े की परतें खुलती गईं। संभागायुक्त दीपक सिंह ने जांच रिपोर्ट जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अक्षय निगम को भेज दी है। देखना है कि अब इस मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अक्षय निगम कब तक और क्या कार्रवाई करते हैं।

यह है पूरा मामला

जीआर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ग्रुप बी, सी तथा डी के एक-एक पद के लिए 17/5/2021 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। उपरोक्त तीनों महिलाओं के साथ अन्य अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किये। कॉलेज प्रशासन ने अपने ही चहेतों को नौकरी देने के लिए चयन प्रक्रिया में प्रोराटा (PRORATA) जिसे अंकतालिका भी कहा जा सकता है, उसे अपनी पसंद के अनुसार बना लिया।

भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच के लिए कॉलेज प्रशासन ने डॉ. केपी रंजन की अध्यक्षता में एक स्क्रूटिनी कमेटी गठित की। कमेटी में डॉ. मनोज बंसल व डॉ. गजेन्द्र पाल सिंह भी सदस्य रहे। आश्चर्य यह रहा कि स्क्रूटिनी कमेटी ने दस्तावेजों का वैरीफिकेशन कराने से पहले ही शुभ्रा सिंह, ज्योति जैन और मीनू जैन को पात्र मान लिया और चयन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन डीन डॉ. समीर गुप्ता, जेएएच के अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़, डॉ राजकुमार आर्य व डॉ. अनिल सस्त्या ने स्क्रूटिनी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नियुक्त पत्र थमाकर नौकरी दे दी।

ऐसे उजागर हुआ फर्जीवाड़ा

नियुक्ति पाने वाली तीनों महिलाओं के अलावा अन्य पात्र अभ्यर्थियों को लगा कि कॉलेज प्रशासन ने फर्जीवाड़ा किया है तो इसकी शिकायत की गई। यह शिकायत दिसंबर 2022 में जांच संभागायुक्त दीपक सिंह तक जा पहुंची।

किसने, कौन से दस्तावेज लगाए फर्जी

-डॉ. विकास जैन की पत्नी ज्योति जैन ने Ethics group of Institute नामक संस्थान का PGDCA का सर्टिफिकेट लगाया। जब जानकारी ली तो पता चला कि इस संस्थान को इस तरह की डिग्री या डिप्लोमा देने की ही पात्रता नहीं है, क्योंकि उसे किसी भी यूनिवर्सिटी से संबद्धता(Affiliation) ही नहीं है।

-डॉ. अमित निरंजन की पत्नी शुभ्रा सिंह ने SARVA Computer नामक संस्था का PGDCA का सर्टिफिकेट लगाया है, जबकि इस प्रकार का कोई संस्थान ही नहीं है। शुभ्रा सिंह ने KS Nursing Collage में 1 अप्रैल 2015 से 15/4/2019 तक गेस्ट फैकल्टी असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया, जबकि भर्ती शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि विजिटिंग फैकल्टी, गेस्ट फैकल्टी,पार्ट टाइम टीचिंग, दूरस्थ शिक्षण संस्थान मोड से प्राप्त डिग्री मान्य नहीं की जाएगी।

-ज्योति जैन ने VISM संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में 13/10/2015 13/2/2019 तक अध्यापन कार्य का अनुभव प्रमाण-पत्र लगाया जबकि उन्होंने कॉलेज में पढ़ाया ही नहीं।

इनका कहना है

मेडिकल कॉलेज के दो डॉक्टरों की पत्नियों तथा एक डॉ़क्टर की भतीजी का चयन हुआ है। उन्होंने जो दस्तावेज संलग्न किये उन्हीं के आधार पर हमने अपनी टीप दी थी। चयनित अभ्यर्थियों से शपथ-पत्र भी लिये गए कि यदि उन्होंने दस्तावेज गलत संलग्न किये हैं तो वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। अब तीनों अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज दिये तो स्क्रूटिनी कमेटी की गलती नहीं है।

डॉ. केपी रंजन, अध्यक्ष स्क्रूटिनी कमेटी

-मेडिकल कॉलेज में साइंटिस्ट के ग्रुप बी,सी,डी पदों पर भर्ती हुई थी। इसमें अनियमतता की शिकायत मिली थी। जांच रिपोर्ट जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन को भेज दी है। वे ही अगली कार्रवाई करेंगे।

दीपक सिंह, संभागायुक्त

-मैंने अभी फाइल नहीं देखी है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कह सकूंगा।

डॉ. अक्षय निगम, डीन जीआरएमसी

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