मानस भवनः लोकायुक्त में केस फिर भी एमआईसी ने दे दी मंजूरी

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भोपाल में लोकायुक्त पेशी पर पहुंची नगर निगम की सहायक आयु्क्त

ग्वालियर।

फूलबाग के पास स्थित नगर निगम की बेशकीमती संपत्ति मानस का मामला गंभीर होता जा रहा है। शर्तों के विपरीत गतिविधियां संचालित करने, आर्थिक रूप से नगर निगम को नुकसान  पहुंचाने का मामला लोकायुक्त की जांच में हैं। सोमवार को नगर निगम की सहायक आयुक्त की इस मामले में भोपाल की लोकायुक्त में पेशी थी। इसके बाद भी इस  भवन को तुलसी मानस प्रतिष्ठान को व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) ने बगैर किसी आपत्ति के परिषद के जरिये शासन को मार्गदर्शन के लिए भेजने का निर्णय लिया है।

दो दशक से संचालित हैं व्यावसायिक गतिविधियां

नगर निगम ने पूर्व में तुलसी मानस प्रतिष्ठान को भवन का एक हिस्सा सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियों के लिये था। लेकिन जब इसमें व्यवसायिक गतिविधियां होने लगी तब नगर निगम परिषद ने न केवल इस संपत्ति को अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव पारित कर दिया बल्कि पिछले 19 साल में इस संपत्ति से व्यवसायिक गतिविधियां संचालित कर कमाई गई राशि को वसूलने का निर्णय लिया था।

क्या राजनीतिक दबाव में हैं अधिकारी

मानस भवन पर एक संस्था का कब्जा है। संस्था के पदाधिकारी सत्तापक्ष से जुड़े हैं। इसलिए वे इस पूरी संपत्ति को अपनी पसंद के हिसाब से उपयोग करते हैं। कभी शादी समारोह तो कभी कपड़ा या अन्य सामग्री की सेल लगाने किराये पर देते हैं। जबकि इस तरह की गतिबिधियां करना पूरी तरह निषेध था। निगम प्रशासन यदि इस परिसर में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर टैक्स वसूलता है तो हर साल लाखों रुपये निगम खजाने में आ सकते हैं। निगम प्रशासन जनता पर तो टैक्स का बोझ लाद देता है किंतु अपनी संपत्तियों को राजनीतिज्ञों से जुड़े रसूखदारों को निःशुल्क दे देता हैं। निगम की इस दोहरी नीति से जनता अपने को ठगा महसूस करती है।

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