नई दिल्ली – उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उप-राज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार के विभिन्न रेजिडेंशल प्रोजेक्ट और अन्य डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए धार्मिक स्थलों को न तोड़ा जाए। इससे लाखों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचेगी और शहर में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के प्रस्तावों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से दी गई रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि मॉडर्न आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग में सब कुछ संभव है। इसलिए लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े इन स्थलों को बचाने के लिए प्रोजेक्ट्स की डिजाइन में बदलाव किया जाए।

दिल्ली सचिवालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी ने कुछ दिन पहले प्रेस रिलीज जारी करके मुझ पर आरोप लगाया था कि मैं डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स की राह में आ रहे धार्मिक स्थिलों को तोड़ने की अनुमति देने वाली फाइलें लेकर बैठा हूं। उस पर कोई निर्णय नहीं ले रहा हूं। जिसकी वजह से काम रुक रहे हैं। सिसोदिया ने बताया कि मेरे पास कुल मिलाकर 19 फाइलें आई थीं। जिनमें अलग-अलग समुदाय के कुल 74 धार्मिक स्थलों को तोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है। जिन विकास कार्यों के लिए इन धार्मिक इमारतों को तोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है उनमें केंद्र सरकार की ओर से आवासीय फ्लैट्स फ्लाईओवर और रोड बनाने के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने एक-एक प्रस्ताव की बारीकी से स्टडी की और इसके प्रभाव का आकलन किया। साथ ही पुलिस की रिपोर्ट्स भी पढ़ी।
उन्होंने दावा किया कि लगभग सभी रिपोर्ट्स में पुलिस ने यह लिखा है कि इन धार्मिक स्थलों को हटाने पर लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है और शहर में लॉ एंड आर्डर की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके बावजूद अगर पुलिस को निर्देश दिया जाएगा तो इस काम के लिए भारी संख्या में फोर्स तैनात की जा सकती है।











