ग्वालियर कोर्ट का बड़ा फैसला: टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड के अधिकारियों पर फर्जीवाड़े और दस्तावेजों की हेराफेरी का मामला दर्ज, समंस जारी

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ग्वालियर:
ग्वालियर न्यायालय से वित्तीय कंपनियों और उनके अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री ऋषव दीक्षित की अदालत ने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक श्याम मनी और वसूली प्रबंधक संदीप द्विवेदी के खिलाफ गंभीर धाराओं में संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने और समंस जारी करने के आदेश दिए हैं।


अदालत ने इस मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467 और 468 के तहत कार्रवाई तय की है, जो दस्तावेजों की कूटसाचना (Forgery) और फर्जीवाड़े से जुड़ी हैं।
क्या है पूरा मामला?
परिवादी आदित्य सिंह तोमर (निवासी-मामा का बाजार लश्कर, ग्वालियर) ने अदालत में परिवाद दायर किया था कि उन्होंने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड से विभिन्न वाहन और वित्तीय ऋण (लोन) लिए थे। परिवादी का मुख्य आरोप था कि उसने बैंकिंग चैनलों और अन्य माध्यमों से अपने लोन खातों में भारी-भरकम भुगतान किया था, लेकिन फाइनेंस कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों ने उन भुगतानों को उनके लोन खातों में सही ढंग से जमा या समायोजित नहीं किया।
परिवादी द्वारा पेश किए गए बैंक स्टेटमेंट और एनईएफटी (NEFT) के दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि फाइनेंस कंपनी को पर्याप्त भुगतान किया गया था। इसके बावजूद, अधिकारियों ने जानबूझकर भुगतानों को खातों में नहीं दर्शाया और झूठा बकाया दिखाते हुए दस्तावेजों व खातों में हेराफेरी की तथा उनके खाली चेकों और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और कानूनी बिंदु:
* धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप पर: अदालत ने माना कि केवल लोन न चुकाने या खातों के विवाद को सीधे तौर पर धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) या धारा 420 (धोखाधड़ी) के दायरे में नहीं लाया जा सकता, क्योंकि शुरुआती रिश्ता कर्जदार और फाइनेंस कंपनी का था और शुरुआत में धोखाधड़ी का इरादा साबित नहीं होता।
* फर्जीवाड़े पर सख्त रुख: हालांकि, अदालत ने दस्तावेजों की हेराफेरी और फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपों (धारा 467 और 468 IPC) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों और रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह स्पष्ट होता है कि दस्तावेजों और खातों में फेरबदल कर झूठी देनदारी दिखाई गई है, जो बिना साक्ष्य और ट्रायल के खारिज नहीं की जा सकती।
नियमित क्रिमिनल केस में बदला मामला, अगली तारीख तय:
अदालत ने आरोपी अधिकारियों श्याम मनी और संदीप द्विवेदी को पेश होने और प्रक्रिया शुल्क जमा करने के आदेश दिए हैं। इस मामले को अन-क्रिमिनल (U.N.C.R.) रजिस्टर से हटाकर नियमित क्रिमिनल केस रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है, जिसमें अभियुक्तों की पेशी होगी।

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