90% सरसों तेल की जगह पानी, 74.77 करोड़ के घोटाले में मुरैना की KS Oils पर CBI में केस

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मुरैना, मप्र
एसटीसी को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का आरोप, रमेशचंद्र गर्ग समेत 12 आरोपितों के खिलाफ एफआइआर; ग्वालियर की कंपनी को भी बताया शेल कंपनी

ग्वालियर/मुरैना। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने सरसों तेल व्यापार वित्तपोषण में 74.77 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर मुरैना की केएस ऑयल्स लिमिटेड और उसके तत्कालीन चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग समेत 12 आरोपितों के खिलाफ नियमित मामला दर्ज किया है।

आरोप है कि वर्ष 2010 से 2014 के बीच स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) को फर्जीवाड़े, साजिश और नियमों की अनदेखी कर भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
सीबीआइ की एफआईआर के अनुसार केएस ऑयल्स ने एसटीसी से सरसों तेल खरीद के लिए 75 करोड़ रुपये की ट्रेड फाइनेंस सुविधा हासिल की थी। जांच में पाया गया कि कंपनी की साख और वित्तीय स्थिति का पर्याप्त सत्यापन किए बिना यह सुविधा मंजूर कर दी गई। बाद में एसटीसी ने 75 करोड़ की स्वीकृत सीमा के बावजूद लगभग 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट (एससी) जारी कर दिए। जांच में सामने आया कि आपूर्ति करने वाली दो कंपनियां-एमएस चंबल वैली एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एमएस ग्वालियर कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, असल में शेल कंपनियां थीं, जिन्हें केएस ऑयल्स के प्रबंधन द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। इन कंपनियों के माध्यम से जारी एलसी की राशि का बड़ा हिस्सा वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचा दिया गया।
सीबीआइ जांच में यह भी सामने आया कि मुरैना और गुना स्थित टैंकों में सरसों तेल के भंडारण की निगरानी के लिए नियुक्त एजेंसी स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड ने स्टॉक प्रमाणित किया था। लेकिन सितंबर 2012 में निरीक्षण के दौरान टैंकों में सरसों तेल की जगह 90 प्रतिशत से अधिक पानी पाया गया।
एफआइआर के अनुसार केएस ऑयल्स निर्धारित समय पर भुगतान और स्टॉक का निस्तारण नहीं कर सकी। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय समय बढ़ाया। परिणामस्वरूप एसटीसी को 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआइ ने तत्कालीन सीएमडी, निदेशकों और महाप्रबंधकों सहित एसटीसी के सात पूर्व अधिकारियों, केएस ऑयल्स, उसके चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग, निदेशक दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड तथा उसके निदेशक अमित खंडेलवाल को आरोपित बनाया है। एजेंसी ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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सीबीआइ जांच की प्रमुख बातें
केएस ऑयल्स को 75 करोड़ की ट्रेड फाइनेंस सुविधा मंजूर हुई थी।
स्वीकृति से अधिक 83.30 करोड़ रुपये के एलसी जारी किए गए।
ग्वालियर कमोडिटीज और चंबल वैली एग्रो को शेल कंपनी बताया गया।
निरीक्षण में टैंकों में 90% से अधिक पानी मिला।
एसटीसी को 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा।
12 आरोपितों के खिलाफ सीबीआइ ने नियमित मामला दर्ज किया।

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