“बुजुर्गों के कंधे पर सरकार” युवा बेरोजगार, मलाईदार पदों पर आ रहे “रसूखदार”

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62 साल बाद भी सरकारी नौकरी से नहीं भर रहा पेट, भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगा रहे घूसघोर

हरीश चन्द्र कुशवाह

युवा दर-दर की ठोकरें खाता घूम रहा है। रोजगार के नाम पर उसे पकोड़े-मगोड़े तलने-बेचने का सुझाव दिया जा रहा है। दूसरी ओर सरकार उच्च शिक्षित, तकनीकी रूप से पारंगत युवाओं के बजाय 62 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों के कंधों पर ज्यादा भरोसा कर रही है। घर बैठने की उम्र में उन्हें संविदा के रूप में पदस्थ कर मलाईदार पदों पर बैठा रही है। ग्वालियर की मुंसीपाल्टी (नगर निगम) इसका सबसे बड़ा जीता जागता उदाहरण है। अब तक ताकतवर चार अधिकारी-कर्मचारी डॉ. अतिबल यादव, लल्लन सेंगर, महेन्द्र शर्मा और आरके शुक्ल “रामू” अपनी पोस्टिंग कराने में सफल हो चुके हैं। कोई सत्ता की धमक तो कोई लक्ष्मी की खनक से पद पाने में सफल हुआ है। भाजपा-कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलु हैं, इसलिये यह खबर उन लोगों के लिए पठनीय है जो जाति-धर्म के नाम पर आपस में लड़ रहे हैं और मलाई राजनेता मिलकर खा रहे हैं।

57 साल बाद कांग्रेस का राज, इसलिये खड़े हो रहे सवाल

जनता ने बड़ा दिल करके, प्रदेश में 20 साल से काबिज भाजपा से पंगा मोल लेके नगर निगम में 57 साल बाद कांग्रेस की महापौर और सरकार बनाई। लेकिन अधिकारी, कर्मचारी, बेरोजगार युवा और जनता अब हताश-निराश हो गई है। कारण यह है कि नगर सरकार कई ऐसे फैसले ले रही है जो न्याय संगत नही हैं। नगर निगम में पर्याप्त अधिकारी होने के बाद भी चारों अधिकारियों को संविदा पर नियुक्ति देने की अनुशंसा उसी नगर सरकार (मेयर इन काउंसिल) ने थी जिसे जनता ने 57 साल बाद चुना था। अब एमआईसी ने लीक से हटकर यह फैसला क्यों लिया, निगम गलियारे में तरह-तरह की चर्चा का विषय बना हुआ है।

दामन पर खूब कीचड़ उछली, फिर भी उजले निकले

डॉ. अतिबल यादव उपायुक्त पद पर रहे। सबसे पहले वे ही संविदा पर नियुक्ति पाने में सफल हुए। एमआईसी ने उनकी तो अनुशंसा कर दी लेकिन विद्युत विभाग से यादव के साथ ही रिटायर हुए सहायक यंत्री देवी सिंह राठौर के आवेदन को निरस्त कर दिया, क्योंकि वे तो लक्ष्मी पुत्र थे न ही सत्ता का साथ था। इसी तरह पीएचई के सहायक यंत्री लल्लन सेंगर, अधीक्षण यंत्री आरके शुक्ला रामू और सहायक वर्ग-3 महेन्द्र शर्मा भी एमआईसी और सत्ता का साथ लेकर सिंहासन तक जा पहुंचे। चारों अधिकारी इतने प्रसिद्ध हैं कि उनके कार्यकाल और कार्यों की चर्चाएं न केवल नगर निगम बल्कि अन्य विभागों में भी चर्चा का विषय रही हैं। लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, विभागीय शिकायत, जांच में घिरे रहे हैं, कुछ अभी भि घिरे हैं।

सहायक वर्ग-3 पर नियुक्ति, बना दिया एपीटीओ

अंधेर नगरी, चौपट राजा की कहावत इस बात से सामने आती है कि शासन ने एक साल के लिए महेन्द्र शर्मा की संविदा नियुक्ति सहायक वर्ग-3 के पद पर की है लेकिन निगमायुक्त ने उन्हें सहायक संपत्तिकर अधिकारी (एपीटीओ) का प्रभार देकर उनकी मनोच्छा पूरी कर दी है।

इनका कहना है

घर बैठने की उम्र में संविदा की परंपरा घोर आपत्तिजनक है। निगम में ऊर्जावान युवाओं की फौज है। उन्हें पदोन्नत कर जिम्मेदारी दी जाना चाहिये। संगठने संविदा परंपरा का विरोध करेगा।

विष्णु शर्मा, जिलाध्यक्ष भारतीय मजदूर संघ

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