ग्वालियर/भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव के कार्यकाल के आखिरी दिन इकबाल सिंह बैंस को छह माह की सेवावृद्धि दिलाकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों को चौंकाया है। मध्यप्रदेश में अगले मुख्य सचिव को लेकर कई दिनों से मीडिया में कयासों का दौर चल रहा था। यहां तक कि वर्तमान मुख्य सचिव के कार्यकाल के आखिरी दिन भी बड़े मीडिया समूहों में ऐसी खबरें प्रकाशित हुई कि मुख्य सचिव सेवानिवृत्त हो रहे हैं। नए बनने वाले मुख्य सचिव के संभावित दावेदारों के नाम भी प्रकाशित किए गए।
भारत सरकार की ओर से इकबाल सिंह बैंस की सेवावृद्धि के जो आदेश जारी किए गए हैं, उसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उनकी सेवावृद्धि के लिए केंद्र को भेजे गए अर्धशासकीय पत्र की तारीख 9 नवंबर 2022 बताई गई है। मुख्य सचिव की सेवानिवृति के तीन सप्ताह पहले सेवावृद्धि के भेजे गए प्रस्ताव को गोपनीय बनाए रखा गया और अंतिम दिन सेवावृद्धि का आदेश जारी हो सका है।
राजनीति के जादूगर
राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी मध्यप्रदेश में भी चुनाव के पहले नए समीकरण बनाने का प्रयास कर सकती है। मुख्य सचिव की सेवावृद्धि के ब्यूरोक्रेटिक फैसले के राजनीतिक मायने और असर भविष्य में होने के संकेत हैं। अब लगभग यह तय माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान की ओर से मध्यप्रदेश में अगला चुनाव शिवराज सिंह चौहान की लीडरशिप में ही लड़ा जाएगा। शिवराज सिंह चौहान को राजनीतिक जादूगर भी कहा जा सकता है। जब-जब यह राजनीतिक कयास लगाए जाते रहे कि शिवराज सिंह चौहान को राजनीतिक रूप से झटका लग सकता है तब-तब उन्हें नई ताकत मिलती रही है।
प्रदेश के चुनाव में लगभग एक साल बचा है। प्रशासनिक जमावट के साथ ही जनता के बीच सत्ता विरोधी रुझान को नियंत्रित करने के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता है। शिवराज सिंह पब्लिक कनेक्ट के नेता हैं। निश्चित रूप से जनता की नब्ज पर उनका हाथ होगा। भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के साथ कांग्रेस भी उत्साहित दिखाई पड़ रही है।
बीजेपी में शामिल होने के बाद सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मूल बीजेपी और सिंधिया के समर्थकों के बीच तालमेल पर सवाल उठते रहते हैं। इस ओर भी बीजेपी संगठन को ध्यान देने की जरूरत होगी। शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय नेतृत्व में अपनी अनडिस्प्यूटेड लीडरशिप को मान्यता का राजनीतिक संदेश देने में सफलता प्राप्त कर ली है। अब अगले चुनावों में जनादेश से बीजेपी की सत्ता को बनाए रखने की चुनौती उनके सामने है।












