व्यापारी अपनी गाड़ी कमाई को बचाने विधि अनुसार व्यापारिक लेन-देन करें : एडवोकेट भूपेन्द्र सिंह चौहान

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जब प्योरिटी कम हो तो आपको प्रोटेक्शन का लेवल बढाना पड़ेगा : एडवोकेट प्रशांत शर्मा
चैक बाउंस पर ‘चेम्बर भवन` में कार्यशाला आयोजित
ग्वालियर 11 जून,2024। मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (MPCCI) द्बारा चैक बाउंस पर कार्यशाला का आयोजन ‘चेम्बर भवन` में किया गया। कार्यशाला में वरिष्ठ अभिभाषक-भूपेन्द्र सिंह चौहान एवं प्रशांत शर्मा जी विधि विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित थे।
कार्यशाला के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत पदाधिकारियों द्बारा फलों की टोकरी भेंट कर किया गया।
इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि चैक बाउंस पर जो कार्यशाला का आयोजन है वह इस कार्यशाला का दूसरा पहलू है, असल में यह कार्यशाला व्यापारिक लेन-देन कानूनी रूप से कितना मजबूत हो, इस पर विधिक जानकारी देने एवं जिज्ञासाओं के समाधान के लिए आयोजित की गई। आज की कार्यशाला में पधारे अतिथियों एवं उपस्थित महानुभावों का मैं हार्दिक स्वागत एवं वंदन करता हूँ।
कार्यशाला का संचालन कर रहे मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल ने कहा कि चेम्बर की नवीन टीम द्बारा कारोबारियों को विधिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्‍य से विधिक जागरूकता उपसमिति का गठन किया गया है और इस उपसमिति की प्रथम बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि व्यवसायियों को उनके व्यापारिक लेनदेन में आ रही परेशानियों जिनमें चैक बाउंस एक बड़ा मुद्दा है, उस पर जागरूक किया जाए। आज की कार्यशाला हमारे इस उद्देश्‍य को पूर्ण करेगी ऐसी मैं आशा करता हूँ।
वरिष्ठ अभिभाषक-भूपेन्द्र सिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूर्व में वस्तु विनिमय का नियम था लोग वस्तु के बदले वस्तु का लेन-देन करते है। समय बदला तो हम चैक से व्यापारिक लेन-देन कर रहे हैं। वर्ष 1998 तक दक्षिण भारत में चैक बाउंस के मामले में ज्यादा आते थे, उत्तर एवं मध्य भारत में यह नगण्य थे। लेकिन वर्तमान में यह हर जगह देखने को मिल रहे हैं। आपने कहा कि पहले निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत मात्र चैक पर हस्ताक्षर करने से आप दोषी हो जाते थे लेकिन वर्ष 2006 में यह बदला और आज चैक ग्रहिता पर भी इसकी जिम्मेदारी आ गई है। आप यदि किसी को चैक देते हैं और वह आपका पैसा नहीं लौटाता है तो न्यायालय में केस जाने पर वह आपकी सम्पन्नता को चैलेंज करता है कि आपने जो मुझे रूपया दिया है क्या उतनी राशि देने के लिए आप सक्षम हैं। अब ऐसी स्थिति के लिए कारोबारी क्या करे ? आपने बताया कि यदि आप ब्याज पर पैसा किसी को दे रहे हैं तो आपका रजिस्ट्रेशन साहूकारी एक्ट तहत होना चाहिए। आप साहूकारी लायसेंस प्राप्त करें। अपने एकाउंट्स में दिये गये पैसे को दर्ज करें। इससे आप अपनी सामर्थ्य को न्यायालय में सिद्घ कर पायेंगे। साहूकारी लायसेंस लेने के बाद ही आप ब्याज प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। रूपये देने वाले से प्रोमिसरी नोट पर हस्ताक्षर करायें। जिस व्यक्ति से आपने चैक प्राप्त किया, उस नाम से व्यक्ति का खाता बैंक में है या नहीं? वह बैंक में दर्ज कराये गये पते पर रहता है या नहीं। आपने निर्धारित अवधि में चैक बैंक में जमा कर दिया है और वह निर्धारित अवधि में जिस बैंक से पैसा आना है, उसमें प्रस्तुत हो गया है। जितनी राशि का चैक इश्यू किया गया है, उतनी लिमिट उस खाते पर है या नहीं। यदि इन सब बातों को आपने सही सुनिश्‍चित कर लिया है तो ही चैक डिसआर्नर होने पर आपका प्रकरण धारा 138 के प्रकरण में जीत की उम्मीद कर सकते हैं। इसी के साथ आपने व्यापारिक लेन देन को विधि अनुसार करने की विस्तार से जानकारी प्रदान करें।
वरिष्ठ अभिभाषक-श्री प्रशांत शर्मा जी ने कहा कि हम पहले प्याऊ से पानी पी लेते थे लेकिन आज बिसलरी की पानी की बोतल पी रहे हैं क्योंकि अब प्याऊ के पानी में प्योरिटी नहीं रही। इसलिए हमने प्रोटेक्शन को अपनाया। इसी प्रकार व्यापारिक लेन-देन में आज विश्‍वास नामक प्योरिटी कम हो गयी है तो हमें विधि अनुसार अपने प्रोटेक्शन लेवल को बढाना होगा। आपने कहा कि हमने आईएसओ सटिर्फिकेशन सुने हैं। यह क्या हैं, जिस किसी के पास भी यह सर्टिफिकेशन है, उन्होंने एक प्रोटोकोल को अपनाया है। इसी प्रकार हम अपने व्यापारिक लेन-देन के प्रोटोकोल को विधि अनुसार बनायें और उन्हें फॉलो करेंगे तो फिर कोई व्यक्ति हमारी गाड़ी कमाई को नहीं हड़प सकेगा। आपने कहा कि जब भी आप पैसा का लेन-देन करे तो उसका एग्रीमेंट करें और उसे दो प्रतियों में बनवायें एक आपके पास रहे। यदि इसमें स्टाम्प की राशि ज्यादा लग रही है तो लगे लेकिन ऑरिजनली वह आपके पास होना चाहिए। यदि आप किसी को एक लाख का लेन-देन कर रहे हैं तो 99 हजार भले ही कैश से दें लेकिन एक हजार उसे चैक से दें। यह एक हजार का चैक आपके 99 हजार कैश की राशि को संरक्षित करेगा क्योंकि आपने लिखकर दिया है कि 99 हजार केश और एक हजार चैक से दिये हैं। हुण्डी का लेन-देन हमारे देश में बैंकिंग से भी ज्यादा लेकिन इसे कानून अनुसार फुलप्रूफ बनायें। इसका प्रोटोकाल और शर्तें आप बना लेंगे और उसका कड़ाई से पालन करेंगे तो आपका धन सुरक्षित रहेगा।
कार्यशाला के अंत में उपस्थित महानुभावों द्बारा अपनी जिज्ञासा संबंधी सवाल किये गये। जिनका समाधान आमंत्रित वरिष्ठ अभिभाषकद्बय-भूपेन्द्र सिंह चौहान एवं प्रशांत शर्मा द्बारा किया गया। पदाधिकारियों द्बारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किये गये।
कार्यक्रम का संचालन मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल द्बारा एवं आभार विधिक जागरूकता उपसमिति के संयोजक-शैलेष जैन द्बारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष-डॉ. राकेश अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-पवन कुमार अग्रवाल, पूर्व संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, पूर्व मानसेवी संयुक्त सचिव-नरेश सिंघल, पूर्व कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल सहित कार्यकारिणी समिति सदस्यगण एवं चेम्बर सदस्यगण काफी संख्या में उपस्थित रहे।

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